भारतीय वायुसेना 23 और 24 नवंबर को अंबाला छावनी वायुसेना केंद्र पर एयर शो का आयोजन करेगी। इस दौरान 'सूर्य किरण' और 'आकाश गंगा' की टीम वायुसेना के विमानों के साथ आकाश में अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगी।
ड्रोन उड़ाने पर रहेगी रोक
वायुसेना ने एयर शो के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली हैं। सुरक्षा के मद्देनजर वायु सेना केंद्र के आसपास ड्रोन उड़ाने पर रोक के लिए धारा-144 के तहत आदेश भी जारी किए जा चुके हैं।
देख सकेंगे लाइव कवरेज
कार्यक्रम के दृष्टिगत यूट्यूब पर लाइव कवरेज की व्यवस्था की जाएगी, ताकि आमजन के साथ अन्य लोग भी इस शो को घर बैठे देख सकें।
भारतीय वायुसेना के बारे में
इससे पहले भारतीय वायु सेना ने 8 अक्टूबर 2023 को अपनी 91 वीं वर्षगांठ मनाई थी। दरअसल, भारतीय वायु सेना की आधिकारिक तौर पर स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। इसलिए भारतीय वायुसेना हर वर्ष इस दिन अपना स्थापना दिवस मनाती है। ज्ञात हो, भारतीय वायु सेना को 7 कमांड में विभाजित किया गया है।
देश की रक्षा के साथ-साथ निभाई ये जिम्मेदारी भी
भारतीय वायु सेना न केवल दुश्मनों से देश की रक्षा करती है बल्कि यह विभिन्न आकस्मिकताओं के दौरान हमारे नागरिकों को बचाने के लिए भी तत्पर रहती है। ऐसे कई मौके आए हैं जब भारतीय वायुसेना तेजी से मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) मिशन चलाने में कामयाब रही है।
वायुसेना के राहत कार्यों का दायरा सबसे विशाल
बारीकी से देखा जाए तो वायुसेना के इन राहत कार्यों का दायरा बहुत विशाल है। यह पूरी तरह से गतिशील स्थिति पर आधारित है जो बड़े पैमाने पर बाढ़, भूकंप, स्थानीय रेल या सड़क व्यवधान की स्थिति, आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य में प्रतिकूल विकास, आवश्यक वस्तुओं की कमी या जैसी आपदाओं के समय काफी मददगार साबित हुई है।
संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे हुए पर्यटकों की सबसे बड़ी मददगार
कई बार फंसे हुए पर्यटकों का भी एक अलग मामला सामने आता है। भारतीय वायुसेना ऐसी स्थिति में हमेशा हवाई मार्ग से राहत और सहायता का पुल स्थापित कर प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और रक्षक के रूप में सामने आई है। इसके सभी विमान और हेलीकॉप्टर चौबीसों घंटे अथक परिश्रम के साथ अपने फर्ज को निभाते हैं। ऐसे में कई बार इनकी तैनाती संकटग्रस्त क्षेत्र में होती हैं। यह उस असहायता और अनिश्चितता के काले बादलों के बीच भी आकाश से आशा की एक उजली किरण के समान साबित हुई है।
पिछले दशक में भारत में बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं की वृद्धि की बीच अक्सर बड़ी संख्या में लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता पड़ी है। ऐसे में भारतीय वायुसेना पर्दे के पीछे रहकर समन्वय और योजना क्षेत्र में कार्रवाई के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त करती रही है जो समग्र मिशन की सफलता सुनिश्चित करती है।


