29/12/23 | 10:21 am

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अयोध्या का नया अध्याय: जानें कितनी बदली भगवान राम की नगरी 

उत्तर प्रदेश के पवित्र और ऐतिहासिक शहर 'अयोध्या का नया अध्याय' लिखा जा रहा है। खास बात है कि वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह शुभ कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में पीएम मोदी 30 दिसंबर, 2023 को अयोध्या का दौरा भी करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी कई परियोजनाएं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री की परिकल्पना अयोध्या में आधुनिक विश्व स्तरीय अवसंरचना का विकास करना, कनेक्टिविटी में सुधार करना और शहर के समृद्ध इतिहास व विरासत के अनुरूप नागरिक सुविधाओं का कायाकल्‍प करना है। इस परिकल्पना को साकार रूप देने के लिए शहर में एक नए हवाई अड्डे, नए पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन, नव पुनर्विकसित, चौड़ी और सौन्दर्यपूर्ण सड़कों तथा अन्य नागरिक अवसंरचना का उद्घाटन किया जा रहा है। इसके अलावा, कई नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी, जो अयोध्या और उसके आसपास नागरिक सुविधाओं के सौंदर्यीकरण और सुधार में योगदान देगी। 

गौरतलब हो, उत्तर प्रदेश का पवित्र शहर अयोध्या, भगवान राम की जन्मस्थली के रूप में अत्यधिक धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। इसी कारण अयोध्या एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल भी बन गया है। शहर की सांस्कृतिक पहचान इसके इतिहास और धार्मिक महत्व के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसे में हर भारतीय के लिए इसके बारे में जानना बेहद दिलचस्प साबित होगा। यहां जानने योग्य है अयोध्या के वह विभिन्न पहलू जो इसकी प्राचीन उत्पत्ति से लेकर इसके मंदिर की भव्यता और कुछ कम ज्ञात तथ्य जो इसकी समृद्धि में योगदान देते हैं।

अयोध्या का इतिहास

अयोध्या की प्राचीन उत्पत्ति के बारे में बात करें तो अयोध्या को पहले साकेत के नाम से जाना जाता था। इसकी एक समृद्ध विरासत है जो ईसा पूर्व पांचवीं या छठी शताब्दी की है। सरयू नदी के तट पर स्थित, अयोध्या ने तीर्थयात्रियों, इतिहासकारों और पर्यटकों को सदैव अपनी ओर आकर्षित किया है जो यहां की पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक जड़ों से जुड़कर उन्हें रोमांचित करती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, अयोध्या प्राचीन कोसल साम्राज्य की राजधानी और भगवान राम का जन्मस्थान था। राजा दशरथ द्वारा शासित इस शहर को एक समृद्ध और सामंजस्यपूर्ण राज्य के रूप में वर्णित किया गया था। इक्ष्वाकु, पृथु, मांधाता, हरिश्चंद्र, सगर, भगीरथ, रघु, दिलीप, दशरथ और राम उन प्रसिद्ध शासकों में से थे जिन्होंने कौशल (कोसल) देश की राजधानी पर शासन किया था।

अयोध्या की संस्कृति एवं विरासत

अयोध्या की संस्कृति एवं विरासत अतीत में सूर्यवंशियों के साम्राज्य से उत्पन्न हुई है। सूर्यवंशी क्षत्रियों के वंश में राजा रघु एक तेजस्वी चरित्र थे जिनके नाम पर सूर्यवंश रघुवंश के नाम से लोकप्रिय हुआ। राजा रघु की तीसरी पीढ़ी में श्री राम का जन्म हुआ, जिनकी छवि आज भी सभी हिंदुओं के हृदय में भगवान के रूप में विद्यमान है। रामायण का काल संभवतः प्राचीन भारत के इतिहास का सबसे गौरवशाली काल था। दरअसल, इसी युग में न केवल सबसे पवित्र धर्म ग्रंथों, वेदों और अन्य पवित्र साहित्य की रचना हुई, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और सभ्यता की नींव रखी, बल्कि यह युग कानून और सच्चाई के शासन में भी अनुकरणीय था। राज्य और समाज की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में राजा अपनी प्रजा के प्रति जवाबदेह था। तथ्यों की सत्यता तीन सहस्राब्दियों से अधिक के बाद भी महाकाव्य में निहित है। भगवान राम रामायण के 'आदर्श पुरुष' थे। उनके चौदह वर्ष के वनवास ने मानव मन को उनके जीवन के अन्य अवधियों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया क्योंकि उन्होंने केवल अपने पिता के वचन का सम्मान बनाए रखने के लिए, अपनी उचित विरासत को त्यागकर जंगल में घूमना शुरू कर दिया था। इसके अलावा भारतीय इतिहास में भी अयोध्या का विशेष स्थान रहा है। अतः धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से भी अयोध्या को प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त हुआ है। अयोध्या के इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यहां आने वाले पर्यटकों और निवासियों की सहुलियत के लिए धर्मनगरी के कायाकल्प का जिम्मा संभाला है।  

नागरिक अवसंरचना में सुधार

इसी के अनुरूप आसन्न श्री राम मंदिर तक पहुंच बढ़ाने के लिए, प्रधानमंत्री अयोध्या में चार नव पुनर्विकसित, चौड़ी और सौन्दर्यपूर्ण सड़कों- रामपथ, भक्तिपथ, धर्मपथ और श्री राम जन्मभूमि पथ का उद्घाटन करेंगे।प्रधानमंत्री कई परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण करेंगे, जो नागरिक अवसंरचना को मजबूत करेंगी तथा अयोध्या और उसके आसपास सार्वजनिक स्थानों को सुंदर बनाएंगी। इन उद्घाटन परियोजनाओं में राजर्षि दशरथ स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालय; अयोध्या-सुल्तानपुर रोड-हवाई अड्डे को जोड़ने वाली चार-लेन सड़क; एनएच-27 बाईपास महोबरा बाजार होते हुए टेढ़ी बाजार श्री राम जन्मभूमि तक फोर-लेन सड़क; शहर भर में कई सुंदर सड़कें और अयोध्या बाईपास; एनएच-330ए का जगदीशपुर-फ़ैज़ाबाद खंड; महोली-बड़ागांव-ड्योढ़ी मार्ग और जसरपुर-भाऊपुर-गंगारामन-सुरेशनगर मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण; पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर बड़ी बुआ रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी; ग्राम पिखरौली में ठोस अपशिष्ट उपचार संयंत्र; और डॉ. ब्रजकिशोर होम्योपैथिक कॉलेज और अस्पताल में नई इमारतें और कक्षाएं, सहित अन्य शामिल है। प्रधानमंत्री ‘मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना’ के कार्य व पांच पार्किंग और वाणिज्यिक सुविधाओं से संबंधित कार्यों का भी उद्घाटन करेंगे।

अयोध्या हवाई अड्डा

अत्याधुनिक हवाई अड्डे के पहले चरण को 1450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल 6500 वर्गमीटर होगा, जो सालाना लगभग 10 लाख यात्रियों की सेवा के लिए सुसज्जित होगा। टर्मिनल भवन का अग्रभाग अयोध्या के आसन्न श्रीराम मंदिर की वास्तुकला को दर्शाता है। टर्मिनल भवन के अंदरूनी हिस्सों को भगवान श्रीराम के जीवन को दर्शाने वाली स्थानीय कला, पेंटिंग और भित्तिचित्रों से सजाया गया है। इस हवाई अड्डे से क्षेत्र में कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिससे पर्यटन, व्यावसायिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन

पुनर्विकसित अयोध्या रेलवे स्टेशन का पहला चरण – जिसे अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता है – 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। तीन मंजिला आधुनिक रेलवे स्टेशन की इमारत लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड प्लाजा, पूजा-अर्चना की सामग्री की दुकानों, क्लॉक रूम, चाइल्ड केयर रूम, वेटिंग हॉल जैसी सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। स्टेशन भवन 'सभी के लिए सुलभ' और 'आईजीबीसी प्रमाणित ग्रीन स्टेशन भवन' होगा।

अमृत भारत ट्रेनें, वंदे भारत ट्रेनें और अन्य रेल परियोजनाएंअयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश में सुपरफास्ट यात्री ट्रेनों की एक नई श्रेणी- अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। अमृत भारत ट्रेन गैर वातानुकूलित डिब्बों वाली एक एलएचबी पुश पुल ट्रेन है। बेहतर गति के लिए इस ट्रेन के दोनों छोरों पर इंजन लगे हैं। यह रेल यात्रियों के लिए सुंदर और आकर्षक डिजाइन वाली सीटें, बेहतर सामान रैक, उपयुक्त मोबाइल होल्डर के साथ मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, एलईडी लाइट, सीसीटीवी, सार्वजनिक सूचना प्रणाली जैसी बेहतर सुविधाएं प्रदान करती है। प्रधानमंत्री छह नई वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री दो नई अमृत भारत ट्रेनों अर्थात दरभंगा-अयोध्या-आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस और मालदा टाउन-सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनस (बेंगलुरु) अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री छह नई वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें श्री माता वैष्णो देवी कटरा-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस; अमृतसर-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस; कोयंबटूर-बैंगलोर कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस; मैंगलोर-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस; जालना-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस और अयोध्या-आनंद विहार टर्मिनल वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं।

प्रधानमंत्री क्षेत्र में रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 2300 करोड़ रुपये की तीन रेलवे परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। परियोजनाओं में रूमा चकेरी-चंदेरी तीसरी लाइन परियोजना शामिल है; जौनपुर-अयोध्या-बाराबंकी दोहरीकरण परियोजना के जौनपुर-तुलसी नगर, अकबरपुर-अयोध्या, सोहावल-पटरंगा और सफदरगंज-रसौली खंड; और मल्हौर-डालीगंज रेलवे खंड का दोहरीकरण और विद्युतीकरण परियोजना शामिल है।

अयोध्या में नई परियोजनाओं का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे, जो अयोध्या में नागरिक सुविधाओं के सुधार में मदद करेंगी और साथ ही शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करेंगी। इनमें अयोध्या में चार ऐतिहासिक प्रवेश द्वारों का संरक्षण और सौंदर्यीकरण; गुप्तार घाट और राजघाट के बीच नए कंक्रीट घाट और पूर्व-निर्मित घाटों का जीर्णोद्धार; नया घाट से लक्ष्मण घाट तक पर्यटक सुविधाओं का विकास एवं सौन्दर्यीकरण; राम की पैड़ी पर दीपोत्सव और अन्य मेलों के लिए आगंतुक गैलरी का निर्माण; राम की पैड़ी से राजघाट और राजघाट से राम मंदिर तक तीर्थ पथ का सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण शामिल है।प्रधानमंत्री अयोध्या में 2180 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित होने वाली ग्रीनफील्ड टाउनशिप और लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाली वशिष्ठ कुंज आवासीय योजना की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री एनएच-28 (नया एनएच -27) लखनऊ-अयोध्या खंड की आधारशिला भी रखेंगे; मौजूदा अयोध्या बाईपास एनएच-28 (नया एनएच -27) का सुदृढ़ीकरण और संशोधन; अयोध्या में सीआईपीईटी केन्द्र की स्थापना तथा नगर निगम अयोध्या एवं अयोध्या विकास प्राधिकरण कार्यालय का निर्माण कार्य।

अयोध्या के बारे में जानने योग्य तथ्य 

अयोध्या प्राचीन कौशल साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी। इसकी औसत ऊंचाई 93 मीटर (305 फीट) है। भगवान श्री राम की जन्मभूमि के रूप में मान्यता के कारण, अयोध्या (अवधपुरी) को हिंदुओं के सात सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों (मोक्षदायिनी सप्त पुरियों) में से पहला माना गया है।जिला: अयोध्या
मुख्यालय: अयोध्या
भाषा: हिंदी (अवधी)क्षेत्र
कुल: 2522.0 वर्ग कि.मी
ग्रामीण: 2459.88 वर्ग कि.मी
शहरी: 62.12 वर्ग कि.मी
जनसंख्या
कुल : 24,70,996
पुरुष : 12,59,628
महिला: 12,11,368

निर्वाचन क्षेत्र
विधानसभा क्षेत्र : 5
संसदीय क्षेत्र : 1

Written by: Rajesh Saini
(Input-PIB)

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