29/11/23 | 1:52 pm

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पिछले 5 वर्षों में देश मे दुग्ध उत्पादन में 22.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज,  उत्तर प्रदेश अग्रणी 

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 2022-23 में दूध, अंडे और मांस के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। परषोत्तम रूपाला ने रविवार (26 नवंबर) गुवाहाटी में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस कार्यक्रम के दौरान बुनियादी पशुपालन आंकड़े 2023 जारी किए और उन्होंने बताया वर्ष 2022-23 के दौरान देश मे दुग्ध उत्पादन 230.58 मिलियन टन होने का अनुमान है, पिछले 5 वर्षों में 22.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान सबसे अधिक दुग्ध उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश था, जिसकी कुल दुग्ध उत्पादन में हिस्सेदारी 15.72 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी अवधि के दौरान ऊन उत्पादन में नकारात्मक वृद्धि देखी गई है। 

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने बताया कि गुवाहाटी में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी 2023 रिपोर्ट, जिसे केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने राष्ट्रीय दुग्ध दिवस कार्यक्रम के दौरान जारी किया, पशु एकीकृत नमूना सर्वेक्षण (मार्च 2022 से फरवरी 2023) पर आधारित है।

ज्ञात हो कि यह सर्वेक्षण पूरे देश में तीन मौसमों, गर्मी (मार्च-जून), मानसून (जुलाई-अक्टूबर) और सर्दी (नवंबर-फरवरी) में आयोजित किया जाता है। केंद्रीय मंत्री रूपाला ने बताया कि वर्ष 2022-23 के दौरान देश में कुल दुग्ध उत्पादन 230.58 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो 2018-19 के आंकड़ों की तुलना में 22.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है जब उत्पादन 187.75 मिलियन टन था।

उत्तर प्रदेश की दुग्ध उत्पादन में हिस्सेदारी 15.72 प्रतिशत
वर्ष 2022-23 के दौरान सबसे अधिक दुग्ध उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश था, जिसकी कुल दुग्ध उत्पादन में हिस्सेदारी 15.72 प्रतिशत थी। इसके बाद राजस्थान (14.44 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (8.73 प्रतिशत), गुजरात (7.49 प्रतिशत) और आंध्र प्रदेश ( 6.70 प्रतिशत) का स्थान था। वार्षिक वृद्धि दर (एजीआर) के संदर्भ में, पिछले वर्ष की तुलना में सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि दर कर्नाटक (8.76 प्रतिशत) में दर्ज किया गया, इसके बाद पश्चिम बंगाल (8.65 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (6.99 प्रतिशत) का स्थान रहा।

देश के कुल अंडा उत्पादन में प्रमुख योगदान आंध्र प्रदेश का
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में कुल अंडा उत्पादन 138.38 बिलियन होने का अनुमान है। वर्ष 2018-19 के दौरान 103.80 बिलियन अंडों के उत्पादन के अनुमान की तुलना में वर्ष 2022-23 के दौरान पिछले 5 वर्षों में 33.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 
उन्होंने आगे बताया कि देश के कुल अंडा उत्पादन में प्रमुख योगदान आंध्र प्रदेश का रहा है, जिसकी हिस्सेदारी कुल अंडा उत्पादन में 20.13 प्रतिशत है, इसके बाद तमिलनाडु (15.58 प्रतिशत), तेलंगाना (12.77 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (9.94 प्रतिशत) और कर्नाटक (6.51 प्रतिशत) का स्थान है। वार्षिक वृद्धि दर (एजीआर) के संदर्भ में, सबसे अधिक वृद्धि दर पश्चिम बंगाल में (20.10 प्रतिशत) दर्ज की गई और उसके बाद सिक्किम (18.93 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (12.80 प्रतिशत) का स्थान रहा।

कुल मांस उत्पादन में प्रमुख योगदान उत्तर प्रदेश का
परषोत्तम रूपाला ने कहा कि वर्ष 2022-23 के दौरान देश में कुल मांस उत्पादन 9.77 मिलियन टन होने का अनुमान है, जिसमें वर्ष 2018-19 में 8.11 मिलियन टन के अनुमान की तुलना में पिछले 5 वर्षों में 20.39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 
उन्होंने आगे कहा कि कुल मांस उत्पादन में प्रमुख योगदान 12.20 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ उत्तर प्रदेश का है और इसके बाद पश्चिम बंगाल (11.93 प्रतिशत), महाराष्ट्र (11.50 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (11.20 प्रतिशत) और तेलंगाना (11.06 प्रतिशत) का स्थान है। वार्षिक वृद्धि दर के संदर्भ में, उच्चतम वार्षिक वृद्धि दर (एजीआर) सिक्किम में (63.08 प्रतिशत) दर्ज की गई है, इसके बाद मेघालय (38.34 प्रतिशत) और गोवा (22.98 प्रतिशत) का स्थान है।

वर्ष 2021-22 की तुलना में देश के ऊन उत्पादन 2022-23 में 2.12 प्रतिशत की बढ़त  
अब बात करते है देश के ऊन उत्पादन की तो बताते है कि  वर्ष 2022-23 के दौरान देश में कुल ऊन उत्पादन 33.61 मिलियन किलोग्राम अनुमान है, जिसमें वर्ष 2018-19 के दौरान 40.42 मिलियन किलोग्राम के अनुमान की तुलना में पिछले 5 वर्षों में 16.84 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, वर्ष 2021-22 की तुलना में 2022-23 में उत्पादन 2.12 प्रतिशत बढ़ गया है। इससे पूर्व में वर्ष 2018-19 में वार्षिक वृद्धि दर -2.51 प्रतिशत; वर्ष 2019-20 में -9.05 प्रतिशत, वर्ष 2020-21 में -0.46 प्रतिशत और वर्ष 2021-22 में -10.87 प्रतिशत थी।

मंत्रालय के अनुसार कुल ऊन उत्पादन में 47.98 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ राजस्थान का प्रमुख योगदान है, इसके बाद जम्मू-कश्मीर (22.55 प्रतिशत), गुजरात (6.01 प्रतिशत), महाराष्ट्र (4.73 प्रतिशत) और हिमाचल प्रदेश (4.27 प्रतिशत) का स्थान है। वार्षिक वृद्धि दर के संदर्भ में देखा जाये तो सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि दर अरुणाचल प्रदेश (35.75 प्रतिशत) में दर्ज किया गया है, इसके बाद राजस्थान (6.06 प्रतिशत) और झारखंड (2.36 प्रतिशत) का स्थान है।

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