05/01/24 | 11:17 am

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भारतीय खिलौना उद्योग ने 2022-2023 में खिलौना निर्यात में 239% की वृद्धि दर्ज की

पिछले कुछ वर्षों में भारत के खिलौना उद्योग ने बहुत अधिक तरक़्क़ी की है। जो सराहनीय है। यह खुशखबरी मेड इन इंडिया खिलौने-सफलता की कहानी' नामक केस स्टडी में सामने आई है, जिसे भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ ने उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अनुरोध पर किया। इस स्टडी रिपोर्ट में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2014-15 की तुलना में 2022-23 में खिलौनों के आयात में 52% की कमी आई है, जबकि निर्यात में 239% की शानदार वृद्धि हुई। यही नहीं घरेलू बाजार में उपलब्ध खिलौनों की गुणवत्ता में भी लगातार सुधार देखा जा रहा है। 

सरकारी के प्रयासों से हुई भारतीय खिलौना उद्योग में हुई वृद्धि

वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ द्वारा किये गए, “भारत में निर्मित खिलौनों की सफलता की कहानी” विषय पर आयोजित एक केस स्टडी में ये बातें सामने आईं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के प्रयासों से भारतीय खिलौना उद्योग के लिए अधिक अनुकूल  मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम  बनाने में मदद मिली है। इसमें यह बताया गया है कि 2014 से 2020 तक 6 वर्षों की अवधि में सरकार के समर्पित प्रयासों से विनिर्माण इकाइयों की संख्या दोगुनी हो गई है, आयातित वस्तुओं पर निर्भरता 33 प्रतिशत से घटकर 12 प्रतिशत हो गई है, सकल बिक्री मूल्य में 10 प्रतिशत सीएजीआर की बढ़ोत्तरी और श्रम उत्पादकता में समग्र वृद्धि दर्ज की गई।

पीएम मोदी चाहते हैं, भारत को वैश्विक खिलौना विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना 

ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगस्त 2020 में अपने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” बात में भारत को वैश्विक खिलौना विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की थी। उनके इस विज़न को पूरा करने के लिए सरकार ने खिलौनों की डिजाइनिंग को बढ़ावा देने, खिलौनों को सीखने के संसाधन के रूप में उपयोग करने, खिलौनों की गुणवत्ता की निगरानी करने, स्वदेशी खिलौना समूहों को बढ़ावा देने के लिए खिलौनों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPT) जैसे व्यापक उपाय करने सहित कई पहल की हैं। सरकार की नीतिगत पहलों के साथ-साथ घरेलू निर्माताओं के प्रयासों से भारतीय खिलौना उद्योग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

भारत एक बड़े निर्यातक देश के रूप में भी उभर रहा है

बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया सहित देशों में घरेलू स्तर पर निर्मित खिलौनों के लिए शून्य-शुल्क बाजार पहुंच के साथ-साथ वैश्विक खिलौना मूल्य श्रृंखला में देश के एकीकरण के कारण भारत एक बड़े निर्यातक देश के रूप में भी उभर रहा है। 

चीन और वियतनाम के विकल्प के लिए, खिलौना उद्योग और सरकार के एकीकृत प्रयास हैं ज़रूरी 

यह भी उल्लेखनीय है कि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को दुनिया के मौजूदा खिलौना केंद्रों यानी चीन और वियतनाम के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए प्रौद्योगिकी में प्रगति, ई-कॉमर्स को अपनाने,  साझेदारी और निर्यात को प्रोत्साहित करने, ब्रांड निर्माण में निवेश, बच्चों के साथ संवाद करने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों के साथ जुड़ने, सांस्कृतिक विविधता को महत्व देने और क्षेत्रीय कारीगरों के साथ सहयोग करने आदि के लिए खिलौना उद्योग और सरकार के लगातार सहयोगात्मक प्रयास आवश्यक हैं। 

सरकार ने इस बारे में कई हस्तक्षेप और पहल कर चुकी हैं लागू 

इन समस्‍याओं के समाधान और भारतीय खिलौना उद्योग में विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इस बारे में कई हस्तक्षेप और पहल लागू कर चुकी हैं। सरकार ने खिलौनों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPT) तैयार की है, जिसमें 21 विशिष्ट कार्य बिंदु शामिल हैं और जिसे DPIIT के समन्वय में 14 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों द्वारा लागू किया जा रहा है। बता दें कि स्वदेशी खिलौनों को बढ़ावा देने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रचार पहल भी की गई हैं, जिनमें द इंडियन टॉय फेयर 2021, टॉयकैथॉन आदि शामिल हैं।