वैश्विक समृद्धि के लिए सबका साथ और सबका विकास जरूरी है। लेकिन हम सभी देख रहे हैं कि पश्चिम एशिया क्षेत्र की घटनाओं से नई चुनौतियाँ उभर रही हैं। भारत ने 7 अक्टूबर को, इजराइल में हुए जघन्य आतंकी हमले की निंदा की है। हमने संयम के साथ ही, डायलॉग और डिप्लोमेसी पर भी जोर दिया है। इजराइल और हमास के संघर्ष में, नागरिकों की मौत की हम कठोर निंदा करते हैं। राष्ट्रपति महमूद अब्बास जी से बात कर हमने फिलिस्तीन के लोगों के लिए मानवीय सहायता भी भेजी है। ये समय है जब ग्लोबल साउथ के देश व्यापक स्तर पर ग्लोबल गुड के लिए एक स्वर में बात करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार (17 नवंबर) को यह बात दूसरे वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में कही। पीएम मोदी ने कहा कि नई टेक्नॉलॉजी, नॉर्थ और साउथ के बीच दूरियां बढ़ाने का नया स्रोत नहीं बनना चाहिए। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एआई के युग में, टेक्नॉलॉजी को जिम्मेदार तरीके से उपयोग में लाने की बहुत जरूरत है। इसको आगे बढ़ाने के लिए भारत में अगले महीने AI ग्लोबल पार्टनरशिप समिट आयोजित की जा रही है ।
वॉयस ऑफ ग्लोबल दुनिया का सबसे अनूठा मंच
अपने उद्घाटन भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि वॉयस ऑफ ग्लोबल (Voice of Global South) 21वीं सदी की बदलती हुई दुनिया का सबसे अनूठा मंच है। भौगोलिक रूप से ग्लोबल साउथ तो हमेशा से रहा है। लेकिन उसे इस प्रकार से आवाज़ (Voice) पहली बार मिल रही है। और ये हम सभी के साझा प्रयासों से संभव हुआ है। हम 100 से ज्यादा अलग-अलग देश हैं, लेकिन हमारे हित समान हैं, हमारी प्राथमिकताएं समान हैं।
विकासशील देशों के लिए टिकाऊ फाइनेंस देने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष दिसंबर में जब भारत ने G20 की अध्यक्षता संभाली तो हमने इस फोरम में ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को आगे बढ़ाना अपना दायित्व माना। हमारी प्राथमिकता थी कि G20 को ग्लोबल स्केल पर समावेशी और ह्यूमन सेंट्रिक बनाया जाए। उन्होंने आगे कहा कि मैं वो ऐतिहासिक क्षण भूल नहीं सकता जब भारत के प्रयासों से अफ्रीकन यूनियन (African Union) को नई दिल्ली समिट में G20 की स्थायी सदस्यता मिली।
G20 में सबने माना कि बहुपक्षीय विकास बैंक ( Multilateral Development Banks) में बड़े सुधार लाए जाएं और विकासशील देशों के लिए टिकाऊ फाइनेंस देने पर जोर दिया जाए।
Biofuel alliance लॉन्च किया गया
पीएम मोदी ने बताया कि सतत विकास लक्ष्य, जो पिछले कुछ सालों में सुस्त पड़ गए थे उनमें तेजी लाने के लिए एक एक्शन प्लान भी बनाया गया। इससे ग्लोबल साउथ के देशों मे चल रहे गरीबी घटाने के कार्यक्रमों को बल मिलेगा। ग्लोबल साउथ के देशों के लिए आसान शर्तों पर जलवायु परिवर्तन के लिए फाइनैन्स और टेक्नॉलॉजी उपलब्ध कराए जाने पर भी सहमति बनी है। इसी समिट में ग्लोबल जैव ईंधन गठबंधन (biofuel alliance) लॉन्च किया गया । यह ग्लोबल साउथ के देशों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
AI ग्लोबल पार्टनरशिप समिट
उन्होंने आगे कहा कि नई टेक्नॉलॉजी, नॉर्थ और साउथ के बीच दूरियां बढ़ाने का नया स्रोत नहीं बनना चाहिए। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एआई के युग में, टेक्नॉलॉजी को जिम्मेदार तरीके से उपयोग में लाने की बहुत जरूरत है। इसको आगे बढ़ाने के लिए, भारत में अगले महीने AI ग्लोबल पार्टनरशिप समिट आयोजित की जा रही है ।
अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023
पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत की पहल पर इस साल को संयुक्त राष्ट्र मिलेट्स का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में मना रहा है। G20 के तहत सुपरफूड मिलेट्स जिसे भारत में हमने श्रीअन्न की पहचान दी है, उन पर रिसर्च करने के लिए नई पहल की गयी है। जिससे जलवायु परिवर्तन और संसाधनो के अभाव से उत्पन्न होने वाली फूड सिक्युरिटी की चिंताओं से लड़ने मे ग्लोबल साउथ को समर्थ्यवान बनाएगा।
ocean based economy महत्वपूर्ण
उन्होंने बताया कि पहली बार G20 में टिकाऊ (sustainable) और समुद्र पर आधारित अर्थव्यवस्था (ocean based economy ) पर बल दिया गया है। ये ग्लोबल साउथ के छोटे आइलैंड विकासशील देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। समिट में ग्लोबल वैल्यू चेन mapping और डिजिटल सर्टिफिकेट को मान्यता देने के लिए, अहम फैसले लिए गए। इससे ग्लोबल साउथ के देशों में एमएसएमई सेक्टर (MSME sector) और व्यापार के लिए नए अवसर खुलेंगे।
क्या है ग्लोबल साउथ ?
ग्लोबल साउथ शब्द का इन दिनों खूब जिक्र हो रहा है। पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और अन्य कई राजनेता भी अक्सर अपने भाषणों में ग्लोबल साउथ का नाम लेते हैं। बता दें कि ग्लोबल साउथ शब्द पहली बार शीत युद्ध के दौरान अमीर, आमतौर पर औद्योगिक रूप से विकसित उत्तरी देशों और दक्षिण के विकासशील देशों के बीच व्यापक आर्थिक विभाजन को बताने के लिए इस्तेमाल किया गया था। ग्लोबल साउथ का तात्पर्य कम आय वाले देशों या अमीर उत्तरी देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम सामाजिक-आर्थिक और औद्योगिक विकास वाले देशों से है। ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ देशों के बीच विभाजन को दर्शाने वाले अधिकांश समकालीन मानचित्र मोटे तौर पर कर्क रेखा से सटे देशों के अलावा कईअन्य देशों को समाहित किए हुए हैं। इसमें मैक्सिको और अधिकांश कैरेबियन, दक्षिण अमेरिका, अधिकांश अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के देश शामिल है। जनवरी 2023 में भारत ने पहली बार वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट की मेजबानी की। भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरा है।


