19/12/23 | 10:07 am

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भूटान नरेश ने गेलेफू शहर परियोजना का किया अनावरण

भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने सोमवार को गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना का अनावरण किया। यह भारत से दक्षिण पूर्व एशिया तक 1000 वर्ग किमी (2,50,000 एकड़) में फैली है। गेलेफू स्पेशल एडमिनिस्ट्रेशन रीजन से पूरे भूटान को लाभ मिलने के साथ ही यहां की सड़कों, पुलों और हवाई अड्डों जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होगी।

गेलेफू की कल्पना आर्थिक केंद्र से कहीं अधिक 

भूटान नरेश वांगचुक ने कहा कि गेलेफू की कल्पना आर्थिक केंद्र से कहीं अधिक है। यह भूटान को दुनिया से जोड़ने और देश के भविष्य को आकार देने वाला प्रवेश द्वार बनने की स्थिति में है। इसका लक्ष्य निवेश आकर्षित करना, व्यापार बढ़ाना और रोजगार पैदा करना है। यह गेलेफू या सैमड्रुप जोंगखार से असम और पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों को जोड़ते हुए म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, मलेशिया और सिंगापुर तक फैला हुआ है। यह एक ऐसा आर्थिक गलियारा बनाता है, जो दक्षिण एशिया को दक्षिण पूर्व एशिया से जोड़ता है।

वांगचुक ने भारत सरकार को उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया 

वांगचुक ने कहा कि मुझे खुशी हो रही है कि मेरी हाल की यात्रा के दौरान भारत सरकार ने भूटान की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों के सुधार और विस्तार के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने हमारे दो या तीन सीमावर्ती शहरों को रेलवे लाइनों से जोड़ने का भी वादा किया है। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार को उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त करना चाहता हूं। गेलेफू विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (एसएआर) की कल्पना एक स्वायत्त आर्थिक केंद्र के रूप में की गई है, जो आवश्यक कानूनों और नीतियों को आकार देने के अधिकार से संपन्न है। भारतीय सीमा से दक्षिण पूर्व एशिया तक के आर्थिक गलियारे के निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। 

परियोजना से पूरे देश को होगा पर्याप्त लाभ

बता दें कि 1000 वर्ग किमी या 2,50,000 एकड़ में फैला गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान के कुल सतह क्षेत्र का केवल 2.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करता है।  गेलेफू या सैमड्रुप जोंगखार से प्रस्तावित भूमि कनेक्शन, असम और पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों को पार करते हुए, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, मलेशिया और सिंगापुर तक फैला हुआ है, जो एक गतिशील आर्थिक गलियारा (economic corridor) बनाता है। जो दक्षिण एशिया को दक्षिण पूर्व एशिया से जोड़ता है। इस परियोजना से पूरे देश को पर्याप्त लाभ होने की उम्मीद है।