केन्द्र सरकार ने कहा है कि देश में उर्वरक उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। भारत विश्व का ऐसा पहला देश है जिसने नैनो यूरिया का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया।
इस संबंध में केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राज्यसभा में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि अभी नैनो यूरिया के नौ संयंत्र देशभर में काम कर रहे हैं। सरकार वर्ष 2025 तक 13 और संयंत्र शुरू करेगी। इन संयंत्रों के माध्यम से नैनो यूरिया के उत्पादन को और अधिक बढ़ाया जाएगा।
दुनिया का पहला देश, जिसने सबसे पहले नैनो यूरिया बनाया
आगे जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि हम दुनिया के पहले देश हैं, जिसने सबसे पहले नैनो यूरिया बनाया है। नैनो यूरिया की 500 एमएल की एक बोतल यूरिया के एक बैग को रिप्लेस कर रही है। इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों कम हुई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उर्वरक क्षेत्र में हम मजबूत हुए हैं लेकिन अभी हमें लगभग 200 लाख टन यूरिया का आयात करना पड़ता है। इसके लिए समय-समय पर निविदा मंगाई जाती है और पारदर्शी तरीके से हम यूरिया की खरीद करते हैं।
कब दी गई थी नैनो यूरिया को मंजूरी ?
गौरतलब हो, फरवरी, 2021 को नैनो यूरिया को मंजूरी दी गई थी। आज 2023 में लगभग 17 करोड़ नैनो यूरिया की बोतल बनाने का इंफ्रास्ट्रक्चर देश में खड़ा कर लिया गया है। अगस्त, 2021 में नैनो यूरिया की मार्केटिंग शुरू हुई थी और मार्च, 2023 तक लगभग 6.3 करोड़ बोतलों का उत्पादन किया जा चुका है, 500 मिली. की इस एक बोतल का फसल पर असर 45 किलो दानेदार यूरिया की बोरी के बराबर है।
नैनो यूरिया से क्या फायदा ?
दरअसल, सरकार मेहनती किसानों को अत्यधिक लाभान्वित करने वाले कदमों को लेकर कार्य कर रही है। भारत तरल नैनो यूरिया उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने भी कहा है कि नैनो यूरिया कम लागत में अधिक उत्पादन करने का माध्यम है।
इसके लाभ के बारे में बात करें तो यूरिया से भरी एक बोरी का स्थान अब नैनो यूरिया की एक बोतल ले सकती है। केवल इतना ही नहीं, इससे यूरिया की परिवहन लागत में भी काफी कमी आई है। महज इतना ही नहीं 2021-22 में देश में यूरिया के आयात में भी सात लाख मैट्रिक टन की कमी आई है।
भारत को बनाएगा आत्मनिर्भर
उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में इफ्को द्वारा लॉन्च किए गए नैनो डीएपी (तरल) प्रोडक्ट के आने के बाद भारत के कृषि क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इसने किसानों की समृद्धि के अंदर बहुत बड़ा योगदान दिया है और उत्पादन व फर्टिलाइजर के क्षेत्र में भारत को निश्चित रूप से आत्मनिर्भर होने की राह दिखाई है।
नैनो यूरिया के उपयोग से सिर्फ पौधे पर छिड़काव के माध्यम से उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बढ़ाने के साथ-साथ भूमि का भी संरक्षण किया जा रहा है। इससे भूमि को फिर से पूर्ववत करने में बहुत बड़ा योगदान मिल रहा हैं। सबसे खास बात ये कि केमिकल फर्टिलाइजर युक्त भूमि होने के कारण करोड़ों भारतीयों के स्वास्थ्य को जो खतरा बन रहा था अब वह भी समाप्त हो जाएगा।


