27/08/26 | 9:32 pm

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ट्रैक्टर की चपेट में आई 21 वर्षीय महिला की करीब तीन घंटे चली जटिल आपातकालीन सर्जरी से जान बची

फरीदाबाद के सेक्टर-8 स्थित सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जानलेवा ट्रॉमा मामले में 21 वर्षीय महिला की जान बचाने में सफलता हासिल की है। महिला के कपड़े ट्रैक्टर के पहिए में फंस गए थे, जिसके बाद वह काफी दूर तक घसीटती चली गई। हादसे में उसे कई गंभीर आंतरिक चोटें आईं और भारी रक्तस्राव हुआ।

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के चिकसोली गांव की रहने वाली महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। वह हेमरेजिक शॉक में थी और उसका ब्लड प्रेशर बेहद कम था। उसे तेज पेट दर्द, सांस लेने में तकलीफ, आंत में छेद और दाहिने पैर में गंभीर चोट के कारण अनियंत्रित रक्तस्राव हो रहा था।
जांच में पता चला कि हादसे में महिला के डायफ्राम में गंभीर चोट के कारण उसमें बड़ा चीरा हो गया था। इसके चलते उसका पेट और बड़ी आंत का एक हिस्सा छाती में खिसक गया था। साथ ही छोटी आंत का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ सलाहकार एवं जनरल और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अर्जुन गोयल के नेतृत्व में मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रॉमा टीम ने तत्काल आपातकालीन सर्जरी का फैसला किया। करीब तीन घंटे चली जटिल सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने फटे हुए डायफ्राम की मरम्मत की और पेट तथा बड़ी आंत को वापस पेट के अंदर स्थापित किया।

डॉक्टरों ने छोटी आंत के क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर आंत को दोबारा जोड़ा। छाती में जमा हवा और तरल पदार्थ को निकालने के लिए चेस्ट ट्यूब भी डाली गई। वहीं, पैर में बुरी तरह क्षतिग्रस्त ऊतक को हटाकर घाव भरने में मदद के लिए विशेष वैक्यूम थेरेपी दी गई।
डॉ. अर्जुन गोयल ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी और सर्जरी में थोड़ी भी देरी उसके लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। समय पर सर्जिकल हस्तक्षेप से शॉक, मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर और मृत्यु के खतरे को टाला जा सका।

ट्रॉमा विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर हादसों के बाद पेट के अंगों का डायफ्राम के फटने के कारण छाती में चले जाना बेहद दुर्लभ है और ऐसे मामले कुल ट्रॉमा मामलों के एक प्रतिशत से भी कम होते हैं। इस तरह की चोटों में तत्काल पहचान, तेज निर्णय और विशेषज्ञ ट्रॉमा एवं सर्जिकल देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है।सर्जरी के बाद महिला को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया। उसे कई यूनिट रक्त चढ़ाया गया और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार हुआ, उसने सामान्य रूप से भोजन लेना शुरू किया और अब वह अपने दैनिक कार्य स्वतंत्र रूप से करने में सक्षम है।

सर्वोदय हेल्थकेयर के चेयरमैन डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि यह दुर्लभ और जानलेवा मामला तेज निदान, समय पर सर्जरी और समन्वित ट्रॉमा केयर के महत्व को दर्शाता है। उन्होंने पूरी मेडिकल टीम के प्रयासों की सराहना की।