‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ के दौरान स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के रिसर्च काउंसिल अध्यक्ष टॉर्स्टन श्वेडे ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड एआई के उपयोग को लेकर समान मूल्यों को साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग समाज के व्यापक हित के लिए किया जाए।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित समिट के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की सराहना करते हुए कहा कि एआई से जुड़ी सामाजिक चुनौतियों पर भारत का दृष्टिकोण प्रभावशाली है। श्वेडे ने कहा कि एआई के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर शुरू हुई यह चर्चा अगले वर्ष जिनेवा में भी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सहयोग की नींव साझा सोच और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग पर आधारित है। उनका मानना है कि एआई को ऐसे विकसित किया जाना चाहिए जिससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिले।
इससे पहले स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन ने भी समिट में भारत की भूमिका की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के तीन मुख्य सिद्धांत — “People, Progress, Planet” — एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए सही दिशा दिखाते हैं।
पारमेलिन ने कहा कि एआई का विकास ऐसा होना चाहिए जिससे आर्थिक और सामाजिक प्रगति के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। उन्होंने भारत को एआई अनुसंधान और नवाचार में तेजी से उभरती शक्ति बताया और दोनों देशों के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं जताईं।
उन्होंने यह भी कहा कि स्विस स्टार्टअप्स भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्साहित हैं। साथ ही, एआई के अंतरराष्ट्रीय नियम और मानक तैयार करने में भारत और स्विट्जरलैंड मिलकर काम कर सकते हैं।
स्विट्जरलैंड ने एआई प्रशासन और वैश्विक सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र स्तर की आगामी चर्चाओं में भारत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
कुल मिलाकर, दोनों देशों के नेताओं के बयान से साफ है कि भारत और स्विट्जरलैंड एआई को मानव केंद्रित, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं।
-(इनपुटःएजेंसी)


