भारतीय सेना ने युद्धक टैंक, पैदल सेना, तोपखाना, रॉकेट प्रणाली, हेलिकॉप्टर और ड्रोन इकाइयों के समन्वित अभियान के जरिए मरुभूमि में ‘अग्नि वर्षा’ सैन्य अभ्यास को अंजाम दिया। वास्तविक युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप किए गए इस अभ्यास में विभिन्न हथियार प्रणालियों और टुकड़ियों ने एक साथ कार्रवाई कर सैन्य क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ अभ्यास

यह अभ्यास भारतीय थल सेना की दक्षिणी कमान द्वारा पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया। रेगिस्तानी क्षेत्र में सेना की ऑपरेशनल तैयारी, संयुक्त युद्ध कौशल और आधुनिक तकनीकी समन्वय का प्रदर्शन इसका मुख्य केंद्र रहा।

आधुनिक हथियार प्रणालियों की संयुक्त कार्रवाई

अभ्यास के दौरान टी-90 मुख्य युद्धक टैंक, पैदल सेना के लड़ाकू वाहन, के-9 वज्र स्वचालित तोप, शरंग तोप प्रणाली और बोफोर्स तोप जैसे सैन्य प्लेटफार्म शामिल रहे। इसके अलावा रॉकेट प्रक्षेपण प्लेटफार्म, स्वदेशी एएलएच ध्रुव शस्त्र हेलिकॉप्टर, एएच-64 अपाचे आक्रमण हेलिकॉप्टर और निगरानी व प्रहारक ड्रोन भी कार्रवाई का हिस्सा बने।

लंबी दूरी तक सटीक प्रहार का प्रदर्शन

भारतीय सेना के अनुसार सभी प्रणालियों ने संयुक्त रूप से लक्ष्यभेदन, मारक क्षमता और संचालन की गति का प्रदर्शन किया। युद्ध जैसी परिस्थितियों में लंबी दूरी तक सटीक प्रहार, संसाधनों की तीव्र तैनाती और बहुआयामी युद्ध संचालन का अभ्यास किया गया।

ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणाली का प्रभावी उपयोग

अभ्यास में ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग किया गया। कठिन रेगिस्तानी परिस्थितियों में सेना की टुकड़ियों ने तेज, सटीक और तालमेलपूर्ण कार्रवाई कर अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया।

विदेशी रक्षा पत्रकारों ने देखा सैन्य प्रदर्शन

इस सैन्य अभ्यास को 25 देशों से आए विदेशी रक्षा पत्रकारों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा। थार मरुस्थल में भारतीय सेना की संयुक्त टुकड़ियों की गति, सटीकता और समन्वय ने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को प्रभावित किया।

आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता पर जोर

‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास भारतीय सेना के तकनीकी आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और युद्ध क्षमता विकास के सतत प्रयासों को दर्शाता है। रेगिस्तान की तपती रेत पर गूंजी यह ‘अग्नि वर्षा’ भारत की सामरिक शक्ति और आत्मविश्वास का सशक्त प्रदर्शन मानी जा रही है। (इनपुट: आईएएनएस)