केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि वह मायापुर में स्थित इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस मंदिर के धार्मिक कार्यक्रम में अपनी आधिकारिक हैसियत से नहीं, बल्कि श्री चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी के रूप में शामिल हुए।
भक्ति विरासत पर दिया जोर
19वीं सदी के वैष्णव पुनरुत्थानवादी और गौड़ीय मठ के संस्थापक भक्तिसिद्धांत सरस्वती के 152वें पवित्र अवतरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने किसी भी राजनीतिक टिप्पणी से परहेज किया और कार्यक्रम के आध्यात्मिक महत्व तथा चैतन्य महाप्रभु की भक्ति परंपरा पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री का संदेश साझा
गृह मंत्री ने बताया कि उन्होंने समारोह में शामिल भक्तों को नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं को ‘हरे कृष्ण’ का संदेश भेजा और इस पावन अवसर पर अपनी शुभेच्छाएं प्रेषित कीं।
अनुयायी के रूप में उपस्थिति
अमित शाह ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम में भारत के गृह मंत्री के रूप में संबोधित किया गया, लेकिन वह वहां उस रूप में नहीं, बल्कि चैतन्य महाप्रभु के एक विनम्र भक्त के तौर पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक चेतना का संदेश समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है।
भक्ति आंदोलन की आधुनिक व्याख्या
गृह मंत्री ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु द्वारा शुरू किए गए भक्ति आंदोलन को भक्तिसिद्धांत सरस्वती ने मजबूत और संस्थागत स्वरूप दिया। उन्होंने युवाओं को मानवता की सेवा और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर प्रेरित करने में इस परंपरा की भूमिका को रेखांकित किया।
आध्यात्मिक मार्ग का संदेश
अमित शाह ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने अज्ञानता में डूबे लोगों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाया और कीर्तन, नृत्य, भक्ति संगीत तथा गीता के संदेश के माध्यम से व्यापक स्तर पर भक्ति चेतना का प्रसार किया। (इनपुट: आईएएनएस)


