08/08/24 | 3:09 pm | CDS Genral Anil Chauhan

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सीडीएस अनिल चौहान ने बांग्लादेश में अशांति और अस्थिरता पर जताई चिंता

शेख हसीना के खिलाफ शुरू हुए आरक्षण विरोधी आंदोलन के बाद बांग्लादेश में अस्थिरता पर भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने पहली बार चिंता जताई है। उन्होंने बांग्लादेश में अशांति, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद पर चिंताओं को उजागर किया । सीडीएस चौहान ने कहा कि तीन साल से चीन के साथ गतिरोध के बावजूद हमारे पास पूर्व और उत्तर में जीवंत सीमाएं हैं। इसलिए पड़ोसी देश बांग्लादेश में अशांति होना निश्चय ही भारत के लिए भी चिंता का विषय है।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान गुरुवार को दिल्ली में सैन्य गोला-बारूद पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़कर भारत आने के बाद वहां अराजकता का माहौल है, जिसने अब वहां सांप्रदायिक रंग ले लिया है। हिंदुओं के साथ ही वहां दूसरे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, जो अब पूर्वोत्तर की सीमा से भारत में पलायन करने की ताक में हैं लेकिन सीमा सुरक्षा बल उन्हें वापस बांग्लादेश भेजकर घुसपैठ को नाकाम कर रहे हैं। भारतीय सेना और बीएसएफ भारत से लगती बांग्लादेश की करीब 4000 किमी. लंबी सीमा पर हाई अलर्ट पर है।

बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर भारत के सीडीएस जनरल अनिल चौहान का चिंता जाहिर करना काफी अहम माना जा रहा है। पड़ोस में फैली अराजकता के बीच पहली बार जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पड़ोस में अशांति चिंता का विषय है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि हम पहले से ही पाकिस्तान के साथ छद्म युद्ध में हैं, जो अब पीर पंजाल के दक्षिण में शुरू हो गया है। 

सीडीएस ने देश की सुरक्षा समस्याओं से निपटने के लिए आत्मनिर्भरता पर दिया जाेर

भारत के पास पहले से ही सुरक्षा चुनौतियां हैं, जिसमें से अब पाकिस्तान के छद्म युद्ध का अचानक जम्मू और कश्मीर के पीर पंजाल रेंज तक विस्तार देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ लंबे समय से चल रहा सीमा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। इस तरह हम दो बड़ी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, अब हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में अस्थिरता हमारे लिए चिंता का एक और कारण है। सीडीएस ने कहा कि भारत जैसा बड़ा देश सुरक्षा समस्याओं की अधिकता के साथ युद्ध लड़ने और जीविका के लिए विदेशी आयात पर निर्भर नहीं रह सकता है।

 

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