केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने मंगलवार को उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दे दी। अब वह 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर सीबीडीटी के चेयरमैन के रूप में कार्य करते रहेंगे।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, रवि अग्रवाल की पुनर्नियुक्ति केंद्र सरकार के पुनर्नियोजित अधिकारियों पर लागू सामान्य नियमों एवं शर्तों के तहत तथा भर्ती नियमों में आवश्यक छूट प्रदान करते हुए की गई है। इस फैसले से देश के सर्वोच्च प्रत्यक्ष कर प्रशासनिक निकाय सीबीडीटी के कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी।
सरकारी आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने रवि अग्रवाल को छह महीने की अवधि के लिए पुनः सीबीडीटी का चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी प्रदान की है। यह नियुक्ति 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी।
भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 1988 बैच के अधिकारी रवि अग्रवाल को जून 2024 में नितिन गुप्ता के स्थान पर सीबीडीटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में प्रत्यक्ष कर प्रशासन में डिजिटलीकरण, कर अनुपालन को मजबूत करने और करदाताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्यरत सीबीडीटी आयकर विभाग की सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था है। यह प्रत्यक्ष कर कानूनों के क्रियान्वयन, कर नीति निर्माण, कर संग्रह, कर अनुपालन को बढ़ावा देने तथा करदाता सेवाओं में सुधार के लिए जिम्मेदार है। बोर्ड में चेयरमैन के अलावा भारत सरकार के विशेष सचिव स्तर के अधिकतम छह सदस्य हो सकते हैं।
रवि अग्रवाल की पुनर्नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब देश में प्रत्यक्ष कर संग्रह लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है। आयकर विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 जून 2026 के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रत्यक्ष कर संग्रह में निरंतर सुधार और मजबूत कर अनुपालन का संकेत माना जा रहा है। (इनपुट- आइएएनएस)


