22/06/26 | 4:00 pm

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दूरसंचार विभाग ने किया BSNL, MTNL और सैटेलाइट सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम एलोकेशन फ्रेमवर्क जारी 

दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत प्रशासनिक तरीके से स्पेक्ट्रम एलोकेशन के लिए नियमों का फ्रेमवर्क (मसौदा) जारी किया है। इन नियमों में विभिन्न दूरसंचार और सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए पात्रता मानदंड, स्पेक्ट्रम शुल्क और आवंटन की शर्तें तय की गई हैं। 

हालांकि, प्रस्तावित ढांचे में स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस जियो की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा सहित सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं देने वाली कंपनियों को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में यह क्षेत्र अभी भी स्पेक्ट्रम एलोकेशन और उसकी कीमत तय करने के लिए अलग नीति का इंतजार कर रहा है।

सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किए गए फ्रेमवर्क नियम मुख्य रूप से पारंपरिक सैटेलाइट संचार सेवाओं को कवर करते हैं। इनमें वीसैट (वेरी स्मॉल एपर्चर टर्मिनल) ऑपरेटर, डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्लेटफॉर्म, टेलीपोर्ट, ब्रॉडकास्टर और सरकारी कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा संचालित सैटेलाइट फोन सेवाएं शामिल हैं।

इसके अलावा, यह फ्रेमवर्क उन स्पेक्ट्रम आवंटनों पर भी लागू होगा जो प्रशासनिक तरीके से सरकारी दूरसंचार कंपनियों बीएसएनएल और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) को दिए जाते हैं। फ्रेमवर्क के अनुसार, प्रशासनिक मार्ग से स्पेक्ट्रम आवंटन दूरसंचार अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप निर्धारित पात्रता शर्तों, शुल्क और आवंटन नियमों के आधार पर किया जाएगा।

डीओटी ने फ्रेमवर्क नियमों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले हितधारकों से अगले 30 दिनों के भीतर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।सरकार के डिजिटल अभियान का असर देश में दूरसंचार और इंटरनेट सेवाओं के बढ़ते उपयोग में भी दिखाई दे रहा है।फरवरी 2026 के अंत में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 1,059.05 मिलियन थी, जो मार्च 2026 के अंत तक बढ़कर 1,065.88 मिलियन हो गई। दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। मार्च 2026 के दौरान मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) के लिए 14.63 मिलियन अनुरोध (रिक्वेस्ट) दर्ज किए गए।

वहीं, पीक विजिटर लोकेशन रजिस्टर (वीएलआर) आंकड़ों के अनुसार, एक्टिव वायरलेस सब्सक्राइबर्स की संख्या 1,185.60 मिलियन रही, जो देश में डिजिटल कनेक्टिविटी के व्यापक विस्तार को दर्शाती है। बीएसएनएल, एमटीएनएल और एपीएसएफएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की वायरलाइन बाजार में लगभग 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, जिससे इस क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण मौजूदगी बनी हुई है।

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