11/06/26 | 4:00 pm

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वन स्टेशन वन प्रोडक्ट के जरिए दिव्यांगजन विश्वकर्मा उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री

पीएम विश्वकर्मा (पीएमवी) सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि के तीन स्तंभों के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों की सहायता के लिए बनाया गया है। पीएमवी योजना के तहत समृद्ध को बढ़ावा देने के लिए, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय दिव्यांगजन विश्वकर्मा कारीगरों के लिए ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (ओएसओपी) पहल लागू कर रहा है। इस पहल के अंतर्गत, अधिक भीड़भाड़ वाले चुनिंदा रेलवे स्टेशनों पर विशेष खुदरा दुकानें स्थापित की गई हैं, जहां कारीगरों के उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की जा सकेगी। ओएसओपी कारीगरों को अधिक पहचान और बेहतर बिक्री के अवसर प्रदान कर उनकी बाजार पहुंच बढ़ाने में सहायक बन रहा है, साथ ही उन्हें स्थायी आजीविका का साधन भी उपलब्ध करा रहा है।

इस प्रयास के माध्यम से, मंत्रालय आर्थिक समावेशन को बढ़ावा दे रहा है, दिव्यांगजन कारीगरों को वित्तीय स्वतंत्रता के लिए प्रोत्साहित कर रहा है और समावेशी विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रहा है।

दिव्यांगजन कारीगरों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए ओएसओपी पहल का परिवर्तनकारी प्रभाव निम्नलिखित रूप में प्रस्तुत किया गया है।

दिव्यांग मूर्तिकार श्री अतुल क्रिस्टल से बनी मूर्तियों और उपयोगी वस्तुओं को गढ़ने की कला में निपुण हैं। उनकी सफलता की कहानी पीएमवी योजना के तहत पंजीकरण से शुरू हुई। इसके बाद मिले कौशल प्रशिक्षण ने उन्हें प्रतिस्पर्धी माहौल में अपनी डिजाइनों को और अधिक नवाचारपूर्ण बनाने की क्षमता प्रदान की। ओएसओपी पहल के तहत, श्री अतुल को इंदौर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1 पर एक समर्पित खुदरा दुकान आवंटित की गई। जनवरी 2026 में दुकान के उद्घाटन के बाद से, ग्राहकों की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक रही है और बिक्री लगातार बढ़ रही है।

 

पीएमवी योजना के तहत पंजीकृत दिव्यांग धातु शिल्पकार श्री अजीत शर्मा को देवघर रेलवे स्टेशन के पास अपने हस्तनिर्मित धातु उत्पादों के लिए एक खुदरा दुकान आवंटित की गई है। उन्होंने 15 दिनों के भीतर 19,000 रुपए की कमाई की। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद, अजीत ने अपनी असाधारण शिल्पकारी और समर्पण से आजीविका का एक स्थायी साधन स्थापित किया है। अजीत की कहानी यह दिखाती है कि पीएमवी योजना कैसे कौशल विकास और ओएसओपी के तहत बाजार सहायता के माध्यम से दिव्यांग शिल्पकारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बना रही है।

 

दिव्यांगजन कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अवसर सृजन
दिव्यांगजन कारीगरों के सामने आने वाली अनूठी चुनौतियों को पहचानते हुए, पीएमवी योजना के तहत ओएसओपी पहल का उद्देश्य उनके कौशल को बढ़ाने, बाजारों तक पहुंच बनाने और उनकी आजीविका में सुधार लाने के लिए संसाधन और अवसर प्रदान करना है। दिव्यांगजन लाभार्थियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ओएसओपी की पहल एक समावेशी वातावरण को बढ़ावा देती है जहां ये प्रतिभाशाली कारीगर फल-फूल सकते हैं और भारत की समृद्ध विरासत में सार्थक योगदान दे सकते हैं।