अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह कार्रवाई 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत की जा रही है।
USTR का आरोप है कि इन देशों ने जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और लागू करने में विफलता दिखाई है। इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
USTR का बयान
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर ने कहा, “कुछ व्यापारिक साझेदार देश जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने में विफल रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। हम अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
USTR ने स्पष्ट किया कि:
– जिन देशों ने जबरन श्रम वाले उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है या आंशिक व्यवस्था लागू की है, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।
– बाकी सभी देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव है।
विशेष प्रावधान
प्रस्ताव में एक टेक्सटाइल मैकेनिज्म का भी जिक्र है, जिसके तहत कुछ देशों से आने वाले कपड़ा और परिधान उत्पादों की निर्धारित मात्रा को कम टैरिफ दर पर अमेरिका में आयात की अनुमति दी जा सकती है।
आगे की प्रक्रिया
USTR ने प्रस्तावित टैरिफ पर 7 जुलाई 2026 को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का ऐलान किया है। सुनवाई के दौरान प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।यह प्रस्ताव वैश्विक व्यापार में जबरन श्रम को बढ़ावा न देने के अमेरिका के सख्त रुख को दर्शाता है। भारत समेत प्रभावित देशों के निर्यात पर इसका काफी असर पड़ सकता है, खासकर वस्त्र, परिधान और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों में। (इनपुट-एजेंसी)


