वित्तीय बाधाओं से शैक्षणिक उत्कृष्टता तक, पीएम-यशस्वी ने राजन कुमार का एमबीए सपना किया पूरा

आर्थिक रूप से वंचित परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों के लिए प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लेना सफलता की शुरुआत तो है, लेकिन उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत अक्सर उनके सपनों के सामने बड़ी बाधा बन जाती है। ऐसे में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के 25 वर्षीय छात्र राजन कुमार के लिए पीएम-यशस्वी योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता उनके एमबीए के सपने को पूरा करने में निर्णायक साबित हुई। राजन ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद कैट में 99.5 पर्सेंटाइल हासिल कर प्रतिष्ठित एमबीए कार्यक्रम में प्रवेश लिया और छात्रवृत्ति की मदद से अपनी पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की।

कैट में 99.5 पर्सेंटाइल से हासिल किया दाखिला

सीमित वित्तीय संसाधनों वाले साधारण परिवार से आने वाले राजन कुमार की हमेशा से प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल से प्रबंधन की शिक्षा हासिल करने की इच्छा थी। कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) में 99.5 पर्सेंटाइल हासिल किया और प्रतिष्ठित एमबीए कार्यक्रम में प्रवेश पाने में सफल रहे।

फीस बनी परिवार के सामने बड़ी चुनौती

एमबीए में दाखिला मिलने के बाद राजन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अत्यधिक ट्यूशन फीस थी। परिवार की सीमित आय में रोजमर्रा के घरेलू खर्चों के साथ उच्च शिक्षा का खर्च उठाना मुश्किल था। ऐसे में आर्थिक चिंता उनकी पढ़ाई और करियर की तैयारियों में बड़ी बाधा बन सकती थी।

पीएम-यशस्वी योजना से मिली 15.51 लाख रुपए की मदद

सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समुदायों के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा में अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2024 से 2026 के दौरान पीएम-यशस्वी योजना के तहत राजन को 15.51 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की। छात्रवृत्ति से उनकी शिक्षा से जुड़ी आर्थिक बाधाएं दूर हुईं और वह बिना रुकावट अपनी पढ़ाई जारी रख सके।

छात्रवृत्ति ने बढ़ाया आत्मविश्वास

राजन कुमार ने अपनी सफलता पर कहा कि पीएम-यशस्वी छात्रवृत्ति ने उनकी जिंदगी बदल दी। उनके अनुसार, छात्रवृत्ति ने आर्थिक मदद देने के साथ यह भरोसा भी बढ़ाया कि उनके सपने महत्वपूर्ण हैं। इससे उनके माता-पिता पर आर्थिक बोझ कम हुआ और उन्हें शिक्षा के खर्च की चिंता किए बिना पढ़ाई, परियोजनाओं और करियर की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला।

पढ़ाई के साथ कौशल विकास पर दिया जोर

आर्थिक दबाव कम होने के बाद राजन ने अपना पूरा ध्यान शिक्षा और पेशेवर विकास पर केंद्रित किया। एमबीए के दौरान उन्होंने अकादमिक प्रस्तुतियों, प्रबंधन परियोजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने लीन सिक्स सिग्मा ग्रीन बेल्ट सर्टिफिकेशन भी हासिल किया।

वित्त और इक्विटी रिसर्च में बनाई दक्षता

राजन ने वित्त, इक्विटी रिसर्च और प्रबंधन से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट भी किए। इन गतिविधियों से उनकी पेशेवर दक्षताओं को मजबूती मिली और करियर की संभावनाएं बेहतर हुईं। छात्रवृत्ति के जरिए मिली आर्थिक स्थिरता ने उन्हें सिर्फ डिग्री हासिल करने तक सीमित रहने के बजाय व्यावसायिक कौशल विकसित करने का अवसर भी दिया।

वंचित छात्रों के लिए अवसर का माध्यम बनी योजना

राजन कुमार की सफलता यह दर्शाती है कि पीएम-यशस्वी योजना के तहत ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों को शीर्ष श्रेणी की शिक्षा के लिए दी जाने वाली सहायता किस तरह वंचित समुदायों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रमुख संस्थानों में उच्च शिक्षा हासिल करने में सक्षम बना रही है।

सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देने पर जोर

सरकार के अनुसार, वित्तीय बाधाओं को दूर कर शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने से युवाओं के सशक्तीकरण और सामाजिक गतिशीलता के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। ऐसी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच देकर अधिक समावेशी और कुशल भारत के निर्माण में योगदान दे रही हैं। (इनपुट: पीआईबी)