शहद से समृद्धि तक का सफर: भारत में मधुमक्खी पालन बना आत्मनिर्भरता का नया मॉडल

राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन यानी एनबीएचएम एक केंद्र प्रायोजित योजना है।इसे भारत सरकार ने देश में मधुमक्खी पालन को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा देकर गुणवत्ता परक शहद और मधुमक्खी उत्पादन के अन्य उत्पादों को प्रोत्साहित करना था। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा क्रियान्वित यह योजना आत्मनिर्भर भारत के बैनर पर 500 करोड़ की लागत पर चलाई जा रही है। वर्ष 2020-21 से शुरू इस योजना को पहले तीन साल के लिए लाया गया पर पूरा बजट नहीं खर्चने की वजह से इसकी मियाद तीन साल और बढ़ा दी गयी।

मधुमक्खी पालन एक कृषि जनित गतिविधि है जो आम तौर पर गांवों में किसानों और भूमिहीन श्रमिकों की समन्वित कृषि गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कई पौधों में परागन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है जिस्मे फसल उत्पादन और किसानो की आमदनी बढ़ाने में सहायता मिलती है। इस कार्य से कई मूल्य वर्धित मधुमक्खी उत्पाद जिसमे मोम, मधु मक्खी पराग कण, प्रोपोलिस नामक पौधे, रॉयल जेली, बी वेनम इत्यादि के उत्पादन के जरिये किसानों की आजीविका के श्रोत और आमदनी बढ़ती है।

भारत की विभिन्नताओं से भरी कृषि जलवायु परिस्थितियों में मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन और इसके निर्यात की व्यापक क्षमता है। ग्रामीण विकास और सतत कृषि में इसके महत्त्व को समझ कर ही भारत सरकार ने एक नयी मीठी क्रांति अभियान के हिस्से के रूप में राष्ट्रीय मधुमक्खी शहद मिशन की शुरुआत की। यह एक महत्वाकांक्षी पहल है जिससे देश में गुणवत्तापरक शहद के उत्पादन के साथ किसानों की आमदनी वैज्ञानिक और संगठित तरीके से मधुपालन के जरिये बढे।

राष्ट्रीय मधुमक्खी शहद मिशन की उप योजनाएं

राष्ट्रीय मधुमक्खी शहद मिशन यानी एनबीएचएम का क्रियान्यवन तीन मिनी मिशन एमएम 1 एमएम 2 और एमएम 3

मिनी मिशन 1- इसके अंतर्गत वैज्ञानिक मधु पालन के तहत परागन क्रिया के जरिये विभिन्न फसलों का उत्पादन और उसकी उत्पादकता उन्नयन पर जोर दिया जाता है। मिनी मिशन 2- यह मिशन मधुमक्खी पालन से जुड़े उत्पादों के आगम के उपरांत के प्रबंधन कार्य मसलन शहद संग्रहण, प्रसंस्करण, भण्डारण, विपणन और मूल्य वर्धन के लिए सभी जरुरी बुनियादी सुविधाओं को मुहैया करता है। मिनी मिशन 3-यह मिशन देश के सभी क्षेत्रो के कृषि जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल तरह तरह के शोध व विकास तथा प्रौद्योगिकी विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।

एनबीएचएम का उद्देश्य

एनबीएचएम का मुख्य उद्देश्य है किसानो की आमदनी और रोजगार की बढ़ोत्तरी के लिए मधुमक्खी पालन उद्योग का संपूर्ण विकास, खेतिहर और गैर खेतिहर परिवारों को आजीविका मुहैया करना और खेती व बागवानी के उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, अतिरिक्त बुनियादी सुविधाओं को विकसित कर मधुमक्खियों का एक क्वालिटी न्यूक्लियस स्टॉक बनाना है, फिर इस स्टॉक को कई गुना और बढ़ाकर शहद निकालने के उपरांत की गतिविधियों मसलन शहद प्रसंस्करण प्लांट, भंडारण, शीतायन, संग्रहण, ब्रांडिंग और विपणन की बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है, इसके अलावा शहद उत्पादन वाले जिलों और प्रान्तों में सभी तरह के आधुनिक गुणवत्ता नियंत्रण लैब स्थापित करना जिससे सभी शहद उत्पादों की शुद्धता की जांच हो, शहद और मधुमक्खी उत्पादों के ब्लॉकचेन और पहचान प्रणाली के जरिए इनके उत्पादन श्रोतों तथा ऑनलाइन पंजीकरण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों का उपयोग करना, सभी शहद उत्पादन की संभावना वाले क्षेत्रों में शहद कॉरिडोर विकसित करना, कृषि उद्यमी तथा कृषि स्टार्टअप को शहद उत्पादन गतिविधियों से जोड़ना, शहद उत्पादन प्रसंस्करण और शहद व्यापारियों व निर्यातकों के बीच व्यापार समझौता कराना, मधुमक्खी पालन उद्योग में अद्यतन तकनीकों को अपनाने का प्रोत्साहन, उसका विकास और इस्तेमाल तथा कौशल विकास जिससे उच्च गुणवत्ता वाले शहद और कृषि उद्यमी तथा कृषि स्टार्टअप को शहद उत्पादन गतिविधियों से जोड़ना, अन्य मधुमक्खी उत्पादों का उत्पादन बढ़ाया जा सके, मधुमक्खी पालन के जरिए नारी सशक्तिकरण, मधुमक्खी पालन के जरिये कृषि क्षेत्र का विविधीकरण आर्थिक सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ को अधिकतम बनाने में सहायक होता है। इससे घरेलू और निर्यात बाजार में उच्च गुणवत्ता वाली शहद और अन्य उत्पादों के व्यापार से मधुमक्खी पालकों को अपना कारोबार विस्तृत करने का मौका मिला है, कई महिलाएं अपनी स्व सहायता समूहों, किसान उत्पादक संघों, मधुमक्खी सहकारिता समूहों और समिति के गठन के जरिये अपना संस्थागत विस्तार करने में सहायता मिली है।

एनबीएचएम की उपलब्धियां

वर्ष 2024 के जनवरी से दिसम्बर माह के दौरान भारत में करीब 1.4 लाख मीट्रिक टन प्राकृतिक शहद का उत्पादन हुआ।

इसके अलावा सरकार ने एनबीएचएम अभियान को त्वरण प्रदान करने के लिए और भी कई प्रयास किये है।:

इसके अंतर्गत 6 विश्वस्तरीय शहद जाँच केंद्र स्थापित किये गए है, इसके आलावा 47 मिनी शहद जाँच लैब, 6 मधुमक्खी बीमारी जाँच लैब, 8 कस्टम हायरिंग केंद्र, 26 शहद प्रसंस्करण इकाई, 12 मधुमक्खी पालन उपकरण इकाई, 18 संग्रहण ब्रांडिंग और विपणन इकाई, 10 पैकेजिंग व शीतायन केंद्र, ये सभी एनबीएचएम अभियान के तहत मार्च 2025 तक स्वीकृत किये गए हैं।

करीब 424 हेक्टेयर भूभाग में मधुमक्खी पालन के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन स्थल तथा करीब 288 हेक्टेयर भूभाग में मधुमक्खी के अनुकूल बनस्पति फार्म एनबीएचएम अभियान के तहत स्थापना के लिए स्वीकृत किये गए हैं । गौरतलब है की मधुमक्खी पालन व्यवसाय के जरिये नारी सशक्तिकरण की दिशा में कुल 167 गतिविधियों को शामिल किया गया है जिसमे देश के विभिन्न राज्यों में महिला स्व सहायता समूहों को एनबीएचएम अभियान में प्रमुखता से डाला गया है।.

इस क्रम में रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संसथान में मधुमक्खी पालन पर एक उत्कृष्ट राष्ट्रीय संस्थान स्थापित किया गया है।
मधुमक्खी पालन क्षेत्र की मांग पर कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपेड़ा ने शहद का एक न्यूनतम निर्यात मूल्य 167.10 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया जो 31 दिसम्बर 2024 तक लागू था ।
एक मधु क्रांति पोर्टल की शुरुआत की गयी है जिसके जरिये शहद व मधुमक्खी पालन से जुड़े अन्य उत्पादों के स्रोतों की पहचान और इसके ऑनलाइन पंजीयन का कार्य किया जाता है।

कुल मिलाकर 14 अक्टूबर 2025 तक करीब 14,859 मधुमक्खी पालक, 269 मधुमक्खी पालन व शहद सोसाइटी, 150 फर्म और 206 कंपनियों का पंजीयन मधु क्रांति पोर्टल पर किया गया है।
एनबीएचएम के अंतर्गत करीब 10000 एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन निर्मित किये गए हैं जिनमे मधुमक्खी पालकों के करीब 100 एफपीओ विपणन क्षेत्र के विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों को प्रदान किये गए है जिनमे ट्राईफेड को 14, नाफेड को 60 और एनडीडीबी को दिए 26 एफपीओ शामिल हैं।.
इसी तरह से राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड को आवंटित 100 एफपीओ में शहद उत्पादको के 97 संघों का पंजीयन किया जा चुका है। मार्च 2025 तक कुल 298 पंजीकृत शहद उत्पादक संघ एनबीएचएम अभियान से लाभान्वित हो चुके है।

भारत से प्राकृतिक शहद का निर्यात

भारत प्राकृतिक शहद की कई वेराइटी का निर्यात करता है जिनमे रेपसीड / सरसो शहद, युक्लिप्टस शहद, लीची शहद, सूरजमुखी शहद इत्यादि शामिल हैं। देश के बड़े शहद उत्पादक राज्यों में उत्तरप्रदेश (17 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (16 प्रतिशत), पंजाब (14 प्रतिशत), बिहार (12 प्रतिशत) और राजस्थान (9 प्रतिशत) शामिल हैं।

वर्ष 2020 -21 में 96.77 मिलियन डॉलर मूल्य का कुल 59. 999 मिलियन टन शहद का निर्यात किया गया जिसके बाद वर्ष 2023 -24 में करीब 1.07 लाख मीट्रिक टन शहद का निर्यात भारत ने किया जिसका कुल मूल्य 177. 52 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। यानी इस दौरान शहद के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है।

भारत से जिन प्रमुख देशों में शहद का निर्यात किया जाता है उनमे अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, क़तर और लीबिया प्रमुख देश हैं। एपेड़ा और क्रिसिल द्वारा जारी आकड़ो के मुताबिक जुलाई 2025 में भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहद निर्यातक देश बन गया था जबकि वर्ष 2020 में इसकी रैंकिंग नौंवी थी।

राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (एनबीबी)

 राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड का गठन सोसाइटी पंजीयन कानून 1860 के तहत 19 जुलाई 2000 को किया गया था। फिर जून 2006 में कृषि और सहकारिता सचिव की अध्यक्षता में इसका पुनर्गठन किया गया। एनबीबी का मुख्य उद्देश्य भारत में मधुमक्खी पालन का वैज्ञानिक तरीके से विकास कर फसल परागण की गतिविधि से फसलों की उत्पादकता बढ़ाना और फिर क्वालिटी शहद का उत्पादन बढ़ाना जिससे किसानो और मधुपालको की आमदनी में बढ़ोत्तरी हो। एनबीबी देश में मधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी नोडल एजेंसी है जो एनबीएचएम अभियान का समवेत क्रियान्वन करती है।

देश स्तरीय क्रियान्वयन संरचना

राष्ट्रीय मधुमक्खी एवं शहद मिशन (NBHM) की कार्यप्रणाली तीन स्तरों पर आधारित है — राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर।

राष्ट्रीय स्तर पर मिशन/पीएमयू पूरे मिशन का समन्वय करता है। सामान्य परिषद/राष्ट्रीय संचालन समिति नीतिगत निर्णय लेती है, जबकि प्रोजेक्ट स्वीकृति समिति और कार्यकारी समूह परियोजनाओं की मंजूरी और परीक्षण करते हैं। राष्ट्रीय नोडल एजेंसी केंद्र स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन का प्रबंधन करती है।

राज्य स्तर पर राज्य संचालन समिति योजनाओं की स्वीकृति, क्रियान्वयन और निगरानी करती है। जिला स्तर पर यही कार्य जिला स्तरीय समिति निभाती है।

क्रियान्वयन में शामिल प्रमुख एजेंसियां हैं — राज्य विभाग, NDDB, NAFED, ICAR, TRIFED, SRLM/NRLM, MSME इकाइयाँ और NBB से जुड़े संस्थान। ये एजेंसियां फ़ील्ड स्तर पर प्रशिक्षण, बुनियादी ढाँचा विकास, शोध एवं विकास और योजना क्रियान्वयन का कार्य करती हैं।

ग्रामीण भारत में मधुमक्खी पालन के  सफलता की कहानी

मेघालय के नोंगथाईममयी गांव में मधुमक्खी पालन एक पुरानी परंपरा है, जिसे लोग आजीविका और स्वास्थ्य रक्षा से जोड़ते हैं। श्री स्टीवेंसन शादप ने प्रशिक्षण लेकर इसे एक पेशेवर व्यवसाय के रूप में विकसित किया। उन्होंने उत्पादन और पैकेजिंग को आधुनिक बनाया और अब सालाना 1–2 लाख रुपये शहद बेचकर कमाते हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव में एक मधुमक्खी सोसाइटी बनाई जा रही है ताकि शहद उत्पादन, पैकेजिंग और मार्केटिंग को संगठित रूप दिया जा सके।

इसी तरह जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में सरकारी सहयोग और लोगों के प्रयासों से मधुमक्खी पालन तेजी से रोजगार का साधन बन रहा है। सरकार ने 200 गांवों में मधुमक्खी बॉक्स और उपकरण 40% सब्सिडी पर उपलब्ध कराए हैं और गुलगाम में 25 लाख की लागत से शहद प्रसंस्करण व बॉटलिंग प्लांट स्थापित किया है। ज़ाकिर हुसैन भट ने 5 कॉलोनी से शुरुआत कर अब 200 कॉलोनी तक विस्तार किया और हर साल लगभग 200 क्विंटल शहद उत्पादन कर रहे हैं। यहाँ करीब 500 किसान 480 क्विंटल ऑर्गेनिक शहद बनाकर 3 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करते हैं। इसे “कुपवाड़ा ऑर्गेनिक शहद” के रूप में GI टैग देने की तैयारी चल रही है।

राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन एनबीएचएम भारत सरकार की एक बहुपक्षीय और बहुआयामी पहल है जो देश में मीठी क्रांति की एक महत्वाकांक्षी अभियान चला रही है। यह अपने तीन मिनी मिशन के जरिये देश में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन की फंडिंग से लेकर इसके तमाम संरचनात्मक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के जरिये शहद उत्पादन के कार्य को एक परंपरागत व्यवसाय से एक उच्च तकनीक आधारित व्यवसायिक उद्यम में परिवर्तित करने का महान कार्य कर रही है।