केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत 544.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस राशि में से 272.07 करोड़ रुपये की पहली किस्त पहले ही जारी की जा चुकी है।
पराली जलाने की समस्या से निपटने के उद्देश्य से वर्ष 2018-19 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को कुल 4,266.47 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।
मंत्रालय के मुताबिक, इस सहायता से राज्यों में 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें वितरित की गई हैं तथा 43,500 से अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने पराली प्रबंधन और उसके स्थायी समाधान को लेकर एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत हुई प्रगति और आगामी धान कटाई सीजन के दौरान पराली के प्रभावी प्रबंधन के लिए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण को प्रदूषित करता है, बल्कि धरती की उर्वरता और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इससे लाभकारी कीट नष्ट होते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए इस समस्या का समाधान अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि चालू वर्ष के लिए राज्यों ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें 46,000 से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का वितरण, 910 कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना तथा 141 पराली आपूर्ति श्रृंखला परियोजनाओं का विकास शामिल है।
बैठक में वर्ष 2026 के धान कटाई सीजन के दौरान अनुमानित 2.762 करोड़ टन पराली के प्रबंधन के लिए राज्यों द्वारा तैयार की गई कार्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई।
चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, स्थानीय निकायों और किसानों के संयुक्त प्रयासों से पिछले वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
बैठक में दोनों मंत्रियों ने बायोमास बिजली संयंत्रों, संपीड़ित बायोगैस (CBG) इकाइयों, एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों और पेलेट निर्माण इकाइयों के माध्यम से पराली के बाह्य उपयोग (Ex-situ Use) को और बढ़ावा देने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास पराली के लिए स्थायी बाजार तैयार कर रहे हैं और कृषि अवशेषों को आर्थिक संसाधन में बदलने का कार्य कर रहे हैं, जिससे किसानों को भी अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।
-(इनपुटःएजेंसी)


