16/09/26 | 7:03 pm

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EPFO की वेतन सीमा बढ़ने से देश के श्रमिकों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का व्यापक कवच: केंद्रीय मंत्री

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने की मंजूरी दिए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ की वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रतिमाह करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह फैसला देश के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का व्यापक कवच प्रदान करने के साथ-साथ रोजगार के औपचारिकता को भी गति देगा।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “श्रमेव जयते! माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हृदय से आभार। आज उनके नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ की वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रतिमाह करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह निर्णय देश के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का व्यापक कवच प्रदान करने के साथ-साथ रोजगार के औपचारिकता को भी गति देगा। मैं देश के सभी कामगारों को यह बताना चाहता हूं कि कल विश्वकर्मा जयंती और सेवा दिवस, दोनों का पावन अवसर है। इसी शुभ दिन से यह महत्वपूर्ण निर्णय लागू होगा।”

इससे पहले एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि सरकार के इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) का लाभ मिलने की उम्मीद है।

सरकार के अनुसार, यह निर्णय न केवल सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि औपचारिक रोजगार को भी बढ़ावा देगा और कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करेगा। बयान में कहा गया कि ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। इसके बाद सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपए किया गया था। अब लगभग 12 वर्षों बाद सरकार ने इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला किया है।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार में लगातार वृद्धि हुई है। कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में ईपीएफओ ढांचे को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाना आवश्यक हो गया था। अभी तक यदि कोई नया कर्मचारी 15,000 रुपए से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करता था, तो वह स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से वंचित रह जाते थे।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद 15,000 रुपए से 25,000 रुपए मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग भी अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के दायरे में आएगा, जिससे लाखों कर्मचारियों को संगठित सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का लाभ मिलेगा। बयान के मुताबिक, वेतन सीमा बढ़ने के साथ कर्मचारियों को तीन प्रमुख लाभ मिलेंगे। पहला, उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के तहत नियमित बचत का लाभ मिलेगा। दूसरा, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के जरिए रिटायरमेंट के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। तीसरा, कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) के तहत बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा, पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अधिक अनुरूप हो जाएगी।

बयान के अनुसार, इस फैसले से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। अधिक कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल होने से नौकरी की स्थिरता बढ़ेगी और कर्मचारी लंबे समय तक एक ही संगठन के साथ जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

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