भारत और किर्गिस्तान की स्पेशल फोर्सेज के बीच 13वां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खंजर 2026’ मंगलवार को मिसामारी में क्लोजिंग सेरेमनी के साथ समाप्त हो गया। 4 फरवरी से 17 फरवरी 2026 तक चले इस अभ्यास में दोनों देशों की एलीट यूनिट्स ने पेशेवर दक्षता और आपसी सहयोग की भावना के साथ भाग लिया। अभ्यास का उद्देश्य आपसी समझ, ऑपरेशनल तालमेल और साझा टैक्टिकल क्षमताओं को मजबूत करना रहा।
संयुक्त प्रशिक्षण से बढ़ी इंटरऑपरेबिलिटी
भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के 20 जवान और किर्गिस्तान की इल्ब्रिस स्पेशल फोर्सेज ब्रिगेड के समान संख्या में सैनिकों ने अभ्यास में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन, स्पेशल ऑपरेशन ड्रिल्स, अर्बन वारफेयर और यूएन मैंडेट के तहत टैक्टिकल अभ्यास पर फोकस रहा। सैनिकों के बीच बेस्ट प्रैक्टिसेस के आदान-प्रदान से इंटरऑपरेबिलिटी और भरोसा मजबूत हुआ।
द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती
2011 से शुरू हुआ यह द्विपक्षीय वार्षिक अभ्यास बारी-बारी से दोनों देशों में आयोजित होता है। पिछला संस्करण मार्च 2025 में किर्गिस्तान में आयोजित हुआ था। क्लोजिंग सेरेमनी में दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और दीर्घकालिक सैन्य सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अभ्यास ने आतंकवाद और उग्रवाद जैसी साझा चुनौतियों से निपटने में भारत-किर्गिस्तान रक्षा साझेदारी को और गहरा किया।
वेस्टर्न एयर कमांड प्रमुख का फ्रंटलाइन एयर बेस दौरा
इसी दौरान भारतीय वायु सेना के वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जीतेंद्र मिश्रा ने एक फ्रंटलाइन एयर फोर्स स्टेशन का दौरा किया। पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने स्टेशन की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की, फाइटर एयरक्राफ्ट में ऑपरेशनल सॉर्टी उड़ाई और एयर वॉरियर्स व सपोर्ट स्टाफ से संवाद किया।
ऑपरेशनल तैयारी पर जोर
एयर मार्शल मिश्रा ने वायुसेना कर्मियों के उच्च मनोबल और पेशेवर क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी तैयारियां देश की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वेस्टर्न एयर कमांड की टीमें हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। (इनपुट: आईएएनएस)


