भारत में ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने गुरुवार को कहा कि 15 जुलाई को लागू होने वाला भारत-UK कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA), दोनों देशों के बीच “विजन 2035” स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की नींव बनेगा। कैमरन ने इस समझौते को एक क्रांतिकारी डील बताया जो दोनों देशों की लॉन्ग-टर्म GDP ग्रोथ को लगभग पांच बिलियन पाउंड तक बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच ज़्यादा “आत्मविश्वासी” और व्यापक द्विपक्षीय संबंध बनेंगे।
उन्होंने कहा, “यह UK और भारत के बीच हमारी ‘विजन 2035’ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का एक अहम हिस्सा है। यह हमारे दोनों देशों के लिए बेहतरीन आर्थिक विकास लाने वाला एक शानदार समझौता है। मुझे लगता है कि लंबे समय में इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को GDP के लिहाज से लगभग पांच बिलियन पाउंड का फायदा होगा। इसलिए हम इसे व्यापक संबंधों के लिए बहुत जरूरी मानते हैं, और इसने एक व्यापक और ज़्यादा आत्मविश्वासी पार्टनरशिप का रास्ता भी खोला है।”
हाई कमिश्नर ने जोर देकर कहा कि इस समझौते का असर पारंपरिक व्यापार से कहीं ज्यादा होगा और यह रक्षा, शिक्षा, टेक्नोलॉजी, विज्ञान जैसे कई क्षेत्रों में संभावनाओं के नए दरवाजे खोलेगा। उन्होंने कहा, “हम रक्षा क्षेत्र में संभावित फायदे देख सकते हैं। उदाहरण के लिए, इस हफ्ते रॉल्स-रॉयस के लोग सरकार से बातचीत कर रहे थे। हमें शिक्षा के क्षेत्र में भी फ़ायदे दिख रहे हैं। नौ ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज भारत में भारतीय युवाओं को पढ़ाने के लिए फिर से कतार में हैं। इसलिए हम टेक्नोलॉजी और विज्ञान समेत कई क्षेत्रों में फ़ायदे देख रहे हैं। इस साल की शुरुआत में दिल्ली में AI कॉन्फ्रेंस हुई थी, जहाँ हमने कई बेहतरीन कंपनियों को पार्टनरशिप करने की इच्छा जाहिर करते देखा।”
उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते ने रिश्तों में राजनीतिक भरोसे को बदल दिया है, जो हाल ही में G7 समिट के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच दिखी गर्मजोशी में साफ तौर पर झलका। उन्होंने कहा, “इसने रिश्तों में राजनीतिक भरोसे को बदल दिया है। आपने G7 में गर्मजोशी देखी होगी। हमारे दोनों प्रधानमंत्री एक-दूसरे की पीठ थपथपा रहे थे और उस समझौते की संभावनाओं को लेकर बहुत उत्साहित थे जिसे उन्होंने व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ाया था।” 15 जुलाई से शुरू होने वाले बिजनेस और कुशल कामगारों के लिए व्यावहारिक बदलावों के बारे में, हाई कमिश्नर ने बताया कि इस समझौते में योग इंस्ट्रक्टर और म्यूजिशियन जैसे पेशों के लिए एक खास कोटा शामिल है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि बिज़नेस से जुड़ी आवाजाही में सुधार और “डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन” को लागू करना खास तौर पर फायदेमंद होगा।
उन्होंने कहा, “कुछ खास पेशों, जैसे योग इंस्ट्रक्टर और म्यूज़िशियन के लिए एक खास कोटा है। साथ ही, बिज़नेस से जुड़ी आवाजाही में सुधार और ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ का मतलब यह होगा कि जो बिज़नेस अपने कर्मचारियों को दूसरे इलाके में काम करने के लिए भेजते हैं, उन्हें दो बार नेशनल इंश्योरेंस नहीं देना पड़ेगा।”
G7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UK के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच हुई अहम बातचीत के बाद घोषित इस समझौते का मकसद 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करके 100-120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
इससे पहले, सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने ANI को बताया कि सरकार यह पक्का करने के लिए काम कर रही है कि कस्टम्स से जुड़े नोटिफ़िकेशन और उससे जुड़ी प्रक्रियाएं लागू हो जाएं, ताकि एक्सपोर्टर पहले दिन से ही छूट का फ़ायदा उठा सकें। सूत्रों ने कहा, “सरकार कस्टम्स नोटिफ़िकेशन और प्रक्रियाओं को लागू करने की दिशा में काम कर रही है। कोशिश यह होगी कि एक्सपोर्टर 15 जुलाई को ही अपने सामान की बिक्री कर सकें और छूट का फ़ायदा उठा सकें।” इस समझौते को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए सरकारी सूत्रों ने कहा, “भारत-UK CETA अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी समझौता है।” उन्होंने कहा कि इससे भारतीय बिज़नेस के लिए 500 अरब डॉलर से ज़्यादा का बाजार खुलेगा।
उम्मीद है कि इस समझौते से भारतीय एक्सपोर्टरों को 7-10 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ फ़ायदा मिलेगा, जिससे भारत उन कई देशों के बराबर आ जाएगा जिन्हें UK के बाज़ार में पहले से ही ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलता है। सूत्रों ने बताया कि इस समझौते के तहत भारत की 99 प्रतिशत से ज़्यादा टैरिफ लाइनों और 99 प्रतिशत व्यापार पर ड्यूटी ज़ीरो हो जाएगी।
(Input-ANI)


