भारत और यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड उत्तरी आयरलैंड के बीच सामाजिक सुरक्षा योगदान से जुड़ा एक अहम समझौता संपन्न हुआ है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच टैलेंट की मोबिलिटी को बढ़ावा देगा और अस्थायी विदेश नियुक्तियों पर जाने वाले कर्मचारियों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से राहत दिलाएगा।
नई दिल्ली में हुआ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारत में ब्रिटेन की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरून सीबी ओबीई ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत सरकार और ब्रिटेन सरकार के बीच सोशल सिक्योरिटी सहयोग से जुड़े इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
डबल सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन से मिलेगी राहत
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह एग्रीमेंट अस्थायी विदेश असाइनमेंट पर काम करने वाले कर्मचारियों के डबल सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन को समाप्त करेगा। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच टैलेंट की आवाजाही आसान होगी, बल्कि नियोक्ताओं और प्रोफेशनल्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
जनवरी 2026 में हुई थी अहम बातचीत
इससे पहले जनवरी 2026 में विदेश मंत्रालय ने बताया था कि भारत और ब्रिटेन के बीच नई दिल्ली में डबल कंट्रीब्यूशन को समाप्त करने को लेकर सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट पर बातचीत हुई थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने आपसी लाभ पर आधारित समझौते की रूपरेखा तैयार की थी।
एम्प्लॉयर्स और क्रॉस-बॉर्डर टैलेंट को होगा लाभ
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता दोहरे सामाजिक सुरक्षा भुगतान को खत्म करता है, जिससे दोनों देशों के नियोक्ताओं और सीमा-पार काम करने वाले प्रोफेशनल्स को सीधा फायदा मिलेगा। इससे क्रॉस-बॉर्डर बिजनेस और रोजगार को भी मजबूती मिलेगी।
उच्चस्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक
दोनों देशों के बीच यह द्विपक्षीय बैठक 21 और 22 जनवरी को आयोजित की गई थी। इसमें भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव पीएस गंगाधर और ब्रिटेन की ओर से नेशनल इंश्योरेंस पॉलिसी के डिप्टी डायरेक्टर एडमंड हेयर शामिल हुए थे।
आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कदम
इस बातचीत में भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग के एक अहम पहलू पर चर्चा हुई। खासतौर पर क्रॉस-बॉर्डर बिजनेस और एम्प्लॉयर्स पर बोझ डालने वाली दोहरी सामाजिक सुरक्षा भागीदारी को समाप्त करने पर फोकस किया गया।
वर्कफोर्स इंटीग्रेशन और आर्थिक जुड़ाव को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के मुताबिक, डबल कंट्रीब्यूशन की चुनौती को दूर कर यह समझौता दोनों देशों के बीच स्किल्ड प्रोफेशनल्स की आवाजाही को आसान बनाएगा। इससे वर्कफोर्स इंटीग्रेशन, रोजगार सुरक्षा और आर्थिक जुड़ाव को नई गति मिलेगी। यह एग्रीमेंट क्रॉस-बॉर्डर बिजनेस और प्रोफेशनल्स के हित में दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। (इनपुट: आईएएनएस)


