भारत ने मंगलवार को कहा कि वह पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी संघर्ष को लेकर गहरी चिंता में है। मंत्रालय ने कहा कि 28 फरवरी से शत्रुता शुरू होने के बाद से स्थिति “लगातार और गंभीर रूप से बिगड़ती” जा रही है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, “28 फरवरी 2026 को ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने पर हमने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। उस समय भी भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव न बढ़ाने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। दुर्भाग्यवश, पवित्र रमज़ान महीने के दौरान क्षेत्र की स्थिति लगातार और गंभीर रूप से बिगड़ती गई है।”
बयान में आगे कहा गया, “हाल के दिनों में हमने न केवल संघर्ष की तीव्रता बढ़ते देखी है, बल्कि इसका विस्तार अन्य देशों तक भी होता देखा है। विनाश और मौतों की संख्या बढ़ी है, जबकि सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। एक निकटवर्ती पड़ोसी और क्षेत्र की सुरक्षा व स्थिरता में महत्वपूर्ण हित रखने वाले देश के रूप में ये घटनाक्रम हमारे लिए गहरी चिंता का विषय हैं।”
क्षेत्र में रह रहे भारतीयों को लेकर सरकार की चिंता रेखांकित करते हुए प्रवक्ता ने कहा, “खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम ऐसे किसी भी घटनाक्रम से उदासीन नहीं रह सकते जो उन पर नकारात्मक प्रभाव डाले। हमारे व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएं भी इसी भू-भाग से होकर गुजरती हैं। किसी भी बड़े व्यवधान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। एक ऐसे देश के रूप में जिसके नागरिक वैश्विक कार्यबल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, भारत व्यापारी जहाजों पर हमलों का भी कड़ा विरोध करता है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे हमलों के कारण कुछ भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है या वे लापता हैं।”
भारत की स्थिति दोहराते हुए बयान में कहा गया, “इस पृष्ठभूमि में भारत संवाद और कूटनीति की अपनी अपील को दृढ़ता से दोहराता है। हम स्पष्ट रूप से संघर्ष के शीघ्र अंत के पक्ष में अपनी आवाज उठाते हैं। पहले ही कई अनमोल जानें जा चुकी हैं और इस पर हम गहरा शोक व्यक्त करते हैं।”
उठाए जा रहे कदमों पर प्रवक्ता ने कहा, “प्रभावित देशों में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास भारतीय नागरिकों और सामुदायिक संगठनों के साथ निरंतर संपर्क में हैं तथा आवश्यकता अनुसार नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं।
संघर्ष के कारण फंसे लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की गई है। दूतावास और वाणिज्य दूतावास इस संघर्ष से जुड़े विभिन्न कांसुलर मामलों में सक्रिय रूप से सहायता करते रहेंगे।”बयान में आगे कहा गया, “हम इस क्षेत्र की सरकारों के साथ-साथ अन्य प्रमुख साझेदारों के संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने अपने समकक्षों के साथ चर्चा की है।” अंत में कहा गया, “सरकार विकसित होती स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखेगी और राष्ट्रीय हित में आवश्यक निर्णय लेती रहेगी।”


