भारत का कम्पोजिट पीएमआई दिसंबर में 58.9 रहा, जो दर्शाता है कि देश में व्यापारिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। यह जानकारी मंगलवार को जारी एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई डेटा में दी गई। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना आर्थिक विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर आर्थिक गतिविधियों में संकुचन का संकेत देता है। नवंबर में कम्पोजिट पीएमआई 59.7 रहा था।
घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती पीएमआई में मजबूती का मुख्य कारण
पीएमआई में मजबूती का मुख्य कारण घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और निर्यात में आई तेजी है, जिससे भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहने में मदद मिल रही है। कम्पोजिट पीएमआई के दो प्रमुख घटक मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर हैं, इसलिए यह देश की समग्र आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण सूचक माना जाता है।
निर्यात ऑर्डर्स तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर
दिसंबर में कंपनियों ने बताया कि मांग की स्थिति अनुकूल बनी हुई है और नए ऑर्डर्स में तेज विस्तार हुआ है, हालांकि विकास की रफ्तार नवंबर की तुलना में कुछ धीमी रही। दिसंबर के कम्पोजिट पीएमआई डेटा की खास बात यह रही कि कुल नए ऑर्डर्स की गति में जहां नरमी आई, वहीं निर्यात ऑर्डर्स में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और वे तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।
वैश्विक बाजारों से नई मांग मिलना, भारतीय व्यवसायों की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति को दर्शाता है
कंपनियों ने ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कनाडा, जर्मनी, मध्य पूर्व, श्रीलंका, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई वैश्विक बाजारों से नई मांग मिलने की जानकारी दी, जो भारतीय व्यवसायों की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति को दर्शाता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन और नए ऑर्डर्स में मजबूत वृद्धि जारी रही, हालांकि इसकी गति नवंबर की तुलना में कुछ कम रही। इसके बावजूद ये आंकड़े मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की स्थिति में ठोस सुधार का संकेत देते हैं और दीर्घकालिक औसत से ऊपर बने हुए हैं।
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने की कर्मचारियों संख्या में बढ़ोतरी
रोजगार के मोर्चे पर निजी क्षेत्र में स्थिरता देखने को मिली। कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या को लगभग यथावत रखा, जिससे संकेत मिलता है कि मौजूदा कार्यबल आगामी ऑर्डर्स को संभालने के लिए पर्याप्त है। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी की, जबकि सेवा क्षेत्र में रोजगार लगभग स्थिर रहा। लगातार तीसरे महीने लंबित कार्यों की संख्या स्थिर बनी रही, जो दर्शाता है कि कंपनियां अपने कार्यभार को प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर रही हैं। (इनपुट-आईएएनएस)


