भारत ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में समकालीन भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय में पूर्वी मामलों के सचिव रुद्रेन्द्र टंडन ने 9 जून को मनीला में आयोजित एआरएफ वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान रुद्रेन्द्र टंडन ने क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में एआरएफ तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया तथा संवाद और कूटनीति के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया।
बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वैश्विक साझा संसाधनों के लिए नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने हेतु सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना वर्ष 1993 में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग और संवाद के मंच के रूप में की गई थी। यह मंच आसियान और उसके पूर्ण संवाद साझेदार देशों के विदेश मंत्रियों के बीच विचार-विमर्श के आधार पर विकसित हुआ।
वर्ष 1995 में एआरएफ ने सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तीन चरणों वाली प्रक्रिया को अपनाया। इसमें पहला चरण विश्वास निर्माण उपाय, दूसरा चरण निवारक कूटनीति का विकास और तीसरा चरण संघर्षों के समाधान के लिए विभिन्न दृष्टिकोण विकसित करना शामिल है। इसकी स्थापना से ही आसियान के सहमति, विश्वास निर्माण और सभी सदस्यों की सुविधा के अनुरूप आगे बढ़ने के सिद्धांतों ने एआरएफ की कार्यप्रणाली को दिशा दी है।
एआरएफ में कुल 27 सदस्य शामिल हैं। इनमें 11 आसियान सदस्य देश ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम शामिल हैं।
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका सहित 10 आसियान संवाद साझेदार देश भी मंच का हिस्सा हैं। बांग्लादेश, उत्तर कोरिया, मंगोलिया, पाकिस्तान, श्रीलंका और पापुआ न्यू गिनी भी इसके सदस्य हैं।
-इनपुटःआईएएनएस


