देश में बढ़ते कार्डियोमेटाबोलिक रोगों (Cardiometabolic Diseases)—जैसे हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और इनसे जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों की शिक्षा और प्रशिक्षण को मजबूत करने की दिशा में नई पहल की जा रही है।
इसी कड़ी में एम्स, नई दिल्ली के Centre of Excellence for the Education of Health Professionals की ओर से Partnership for Education of Health Professionals (PEP) Programme के तहत एक महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर वर्कशॉप आयोजित की जा रही है। केंद्र का नेतृत्व प्रोफेसर निखिल टंडन और अंबुज रॉय कर रहे हैं।
वर्कशॉप में विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, कार्यक्रम प्रमुखों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ NCD के राज्य नोडल अधिकारियों, ICMR और NHSRC के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न अकादमिक संस्थानों के संकाय सदस्यों को शामिल किया गया है।
इस दौरान परियोजना के प्रारंभिक चरण में सामने आए निष्कर्षों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य पेशेवरों की प्री-सर्विस और इन-सर्विस शिक्षा, प्रशिक्षण की जरूरतों, कार्यक्रम के क्रियान्वयन की प्राथमिकताओं और संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा हो रही है।
वर्कशॉप का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों के अनुभव और विशेषज्ञता को एक साथ लाकर ऐसे व्यावहारिक उपाय तैयार करना है, जिनसे देशभर में स्वास्थ्य पेशेवरों को कार्डियोमेटाबोलिक रोगों की रोकथाम, पहचान और प्रबंधन के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।
इस पहल का व्यापक लक्ष्य साक्ष्य और जमीनी अनुभव को प्रभावी प्रशिक्षण और शिक्षा मॉडल में बदलना, स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता बढ़ाना और देश में कार्डियोमेटाबोलिक रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों की तैयारियों को मजबूत करना है।


