06/12/23 | 11:33 am

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MSP को लेकर स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों पर काम कर रही सरकार

केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों पर काम कर रही है। इस संबंध में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार देश के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देती है। उन्होंने यह भी बताया कि किसान आंदोलन के बाद बनी समिति की सिफारिशें आनी बाकी हैं। उसके बाद ही सरकार एमएसपी को कानूनी अधिकार का दर्जा देने पर कोई फैसला ले सकती है। 

MSP को कानूनी अधिकार देने समेत किसानों से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए बनाई स्वामीनाथन समिति

लोकसभा में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह जानकारी दी है। आगे जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अब सरकार किसानों से 2.28 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी को सार्थक बना रही है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के बाद एमएसपी को कानूनी अधिकार देने समेत किसानों से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए एक समिति बनाई गई थी। इस समिति की अब तक 35 बैठकें हो चुकी हैं और इसकी सिफारिशें आनी बाकी हैं।

प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन ने किया स्वामीनाथन समिति का नेतृत्व

ज्ञात हो, दो दिन पहले राज्यसभा में हरित क्रांति के जनक कहे जाने वाले प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि अर्पित की गई थी। दरअसल, इन्हीं स्वामीनाथन ने उस समिति का नेतृत्व किया था जिसने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्पादन की भारित औसत लागत का 50 प्रतिशत करने की सिफारिश की थी।  ऐसे में प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन के बारे में जानना भी बेहद दिलचस्प होगा। एम.एस. स्वामीनाथन के योगदान से भारत को सूखाग्रस्त, खाद्य आयातक देश से उठ कर खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर घोषित होने में मदद मिली।

भारत में कृषि क्षेत्र में प्रमुख वास्तुकार थे स्वामीनाथन 

उल्लेखनीय है कि प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और भारत की हरित क्रांति के जनक कहे जाने वाले एम.एस. स्वामीनाथन का 98 वर्ष की आयु में इस साल 28 सितंबर को चेन्नई में निधन हो गया था। स्वामीनाथन भारत में कृषि क्षेत्र में 1960 के दशक में शुरू हुए सुधार के प्रमुख वास्तुकार थे। 

स्वामीनाथन ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में बनाया आत्मनिर्भर राष्ट्र 

जब 1965 और 1966 में सूखे ने कृषि को प्रभावित किया और देश में खाद्य संकट पैदा हो गया, तो कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने बड़े पैमाने पर भुखमरी की स्थिति की भविष्यवाणी की। इसके बाद के वर्षों में स्वामीनाथन ने वैज्ञानिक नवाचार और प्रशासनिक कौशल के साथ भारत को बड़े पैमाने पर आयातक से खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर राष्ट्र में बदल दिया।

प्रो. स्वामीनाथन भारत की हरित क्रांति के जनक 

प्रो. स्वामीनाथन ने उस समिति का भी नेतृत्व किया जिसने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्पादन की भारित औसत लागत का 50 प्रतिशत करने की सिफारिश की थी। स्वामीनाथन को भारत की हरित क्रांति का नेतृत्व करने के लिए प्रथम विश्व खाद्य पुरस्कार, पद्म विभूषण और रमन मैग्सेसे पुरस्कार के अलावा कई अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

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