10/03/26 | 8:13 pm

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पश्चिम बंगाल-झारखंड में मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स से रेल कनेक्टिविटी और माल ढुलाई में बड़ा सुधार होगा : पीएम मोदी

पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति (सीसीईए) ने पूर्वी भारत में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को कवर करती हैं और कुल 4,474 करोड़ रुपए की लागत से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 192 किलोमीटर की वृद्धि करेंगी, जिनकी 2030-31 तक पूरी होने की उम्मीद है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “पूर्वी भारत में रेल कनेक्टिविटी और कैपेसिटी बढ़ाना! कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को कवर करने वाले मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स से इन राज्यों में एफिशिएंसी बढ़ेगी, कंजेशन कम होगा और कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इनसे माल ढुलाई में भी सुधार होगा, इकोनॉमिक एक्टिविटी को सपोर्ट मिलेगा और सस्टेनेबल, लो-कार्बन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा।”

स्वीकृत परियोजनाएं में सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन शामिल हैं। ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जो एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर फोकस करती हैं। बढ़ी हुई लाइन क्षमता से परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा, साथ ही भीड़भाड़ कम होगी। इससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा।

इन परियोजनाओं से लगभग 5,652 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जहां करीब 147 लाख की आबादी रहती है। प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य और रामेश्वर कुंड तक पहुंच आसान बनेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

माल ढुलाई के क्षेत्र में भी बड़ा फायदा होगा। ये मार्ग कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा-इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल और कंटेनर जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। क्षमता वृद्धि से प्रतिवर्ष अतिरिक्त 31 मिलियन टन माल ढुलाई संभव होगी। रेलवे पर्यावरण-अनुकूल होने के कारण जलवायु लक्ष्यों में योगदान देगा। तेल आयात में 6 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 28 करोड़ किलोग्राम की कमी होगी, जो लगभग 1 करोड़ पौधारोपण के बराबर है। इससे रसद लागत भी कम होगी और सस्टेनेबल विकास को बल मिलेगा।

यह फैसला नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय विकास, आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर केंद्रित है। पूर्वी भारत में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा।

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