जनजातीय कार्य मंत्रालय 3 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा। एकीकृत जनजातीय विकास अभिकरणों (आईटीडीए) और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं (आईटीडीपी) को सशक्त बनाने पर केंद्रित इस सम्मेलन में देशभर से जनजातीय कल्याण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के निदेशक, आईटीडीए/आईटीडीपी के परियोजना अधिकारी, केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ तथा नीति निर्माता भाग लेंगे। 26 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। इस दौरान एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) का नेटवर्क बढ़कर 499 कार्यरत विद्यालयों तक पहुंच गया है। लगभग 30 लाख जनजातीय छात्रों को प्रतिवर्ष 22,000 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। इसके अलावा पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनका संयुक्त परिव्यय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। मंत्रालय का वार्षिक बजट भी 4,295 करोड़ रुपये से बढ़कर 13,000 करोड़ रुपये हो गया है।
सम्मेलन के दौरान जनजातीय क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे ‘जनजातीय गौरव उत्सव 2026’ और ‘जन भागीदारी अभियान’ की उपलब्धियों पर भी चर्चा होगी। 18 से 25 मई 2026 तक चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य दूरस्थ और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सरकारी सेवाओं को सीधे पहुंचाना था। अभियान का मूल मंत्र ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ रखा गया था।
अभियान के तहत देशभर में 57 हजार से अधिक शिविर और जनसंपर्क गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनके माध्यम से 90 लाख से अधिक जनजातीय नागरिकों से सीधा संपर्क स्थापित किया गया। इसके अतिरिक्त 1.52 लाख मनरेगा सहायता गतिविधियां, 2.27 लाख आधार सेवा हस्तक्षेप, 1.76 लाख आयुष्मान भारत नामांकन, 1.09 लाख राशन कार्ड सहायता गतिविधियां, 98 हजार से अधिक जाति प्रमाण पत्र सहायता मामले, 1.19 लाख सिकल सेल रोग जांच गतिविधियां और 70 हजार से अधिक पेंशन संबंधी सेवाएं प्रदान की गईं। साथ ही जनधन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पोषण वाटिका, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जुड़े कार्य भी किए गए।
जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान के दौरान 37 हजार से अधिक सूचना एवं जनसंपर्क होर्डिंग लगाए गए, 21 हजार से अधिक सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए गए तथा लगभग 20 हजार दीवार चित्र बनाए गए। गांव स्तर पर जनसुनवाई, संवाद कार्यक्रम और सामुदायिक जागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन किया गया।
जनजातीय गौरव उत्सव केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा। इसके अंतर्गत जनजातीय नृत्य महोत्सव, हस्तशिल्प प्रदर्शनियां, युवा सहभागिता कार्यक्रम, उद्यमिता प्रदर्शन और डिजिटल समावेशन कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। इन पहलों का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक संरक्षण और उद्यमिता के महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित करना है।
राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीईएनएसई) में स्थापित प्रशिक्षण फैब का वर्चुअल उद्घाटन करेंगी। यह सुविधा जनजातीय छात्रों को सेमीकंडक्टर निर्माण और उभरती प्रौद्योगिकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी, जिससे उन्हें भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों में अवसर प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति देश के विभिन्न हिस्सों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्थापित 75 स्पेस लैब का भी उद्घाटन करेंगी। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के सहयोग से स्थापित इन स्पेस लैब्स का उद्देश्य जनजातीय छात्रों में खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, रोबोटिक्स और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रति रुचि विकसित करना है।
सम्मेलन के दौरान ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ नामक एक फिल्म भी लॉन्च की जाएगी, जिसमें जनजातीय गौरव उत्सव और जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा।
सम्मेलन में संस्थागत ढांचा और मानव संसाधन, वित्तीय संरचना और धन प्रवाह, निगरानी एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा योजनाओं के अभिसरण और वितरण जैसे चार प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इन चर्चाओं के आधार पर आईटीडीए और आईटीडीपी संस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किए जाने की संभावना है। यह सम्मेलन जनजातीय क्षेत्रों में सुशासन, सेवा वितरण और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


