भारतीय नौसेना को जल्द ही 4 विशेष ईंधन आपूर्ति नौकाएं मिलेंगी, जिनका निर्माण स्वदेश में किया जाएगा। 500 टन क्षमता से लैस ये स्वचालित ईंधन आपूर्ति नौकाएं बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को सीधे ईंधन उपलब्ध कराने में सक्षम होंगी, जिससे नौसेना की परिचालन क्षमता और तत्परता में वृद्धि होगी।
ठाणे की कंपनी से हुआ अनुबंध
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन नौकाओं के निर्माण के लिए महाराष्ट्र के ठाणे स्थित सॉफ्ट शिपयार्ड लिमिटेड के साथ अनुबंध किया गया है। यह एक निजी जहाज निर्माण कंपनी है। यहां निर्मित आधुनिक नौकाएं बंदरगाह या लंगर डाले खड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों तक सीधे ईंधन पहुंचाएंगी। इससे बड़े जहाजों को अलग से ईंधन भरवाने की आवश्यकता नहीं होगी और उनका समय बचेगा।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बल
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन नौकाओं का निर्माण पूरी तरह देश में ही किया जाएगा। यह पहल सरकार के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देगी। इससे देश में जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को भी अवसर मिलेंगे। निर्माण प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और गुणवत्ता के सभी निर्धारित मानकों का पालन किया जाएगा, ताकि नौसेना को विश्वसनीय और सुरक्षित नौकाएं मिल सकें।
2026 में 15 पोत शामिल करने की योजना
नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने हाल ही में बताया था कि वर्ष 2026 में लगभग 15 पोत नौसेना में शामिल करने की योजना है। वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना का लक्ष्य 200 से अधिक पोतों वाली शक्ति बनने का है। वर्तमान में 50 पोत भारतीय शिपयार्डों में निर्माणाधीन हैं। वहीं 2047 तक पूर्णत: आत्मनिर्भर नौसैनिक शक्ति बनने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
‘अंजदीप’ से बढ़ी पनडुब्बी रोधी क्षमता
हाल ही में भारतीय नौसेना में स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस अंजदीप शामिल किया गया है। यह उथले जल में पनडुब्बी रोधी अभियान के लिए डिजाइन किया गया है और ‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में कार्य करता है। यह युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसमें अत्याधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर पैकेज लगाए गए हैं। पोत में हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ के साथ हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेट भी शामिल हैं। (इनपुट: आईएएनएस)


