केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब यह लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले व्यावहारिक समाधान प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि एआई का भविष्य प्रचार से नहीं, बल्कि ठोस परिणामों से तय होगा।

लोगों के लिए काम करने वाली एआई पर जोर

‘एल्गोरिदम से परिणामों तक: लोगों के लिए काम करने वाली एआई का निर्माण’ विषय पर सत्र को संबोधित करते हुए एस. कृष्णन ने कहा कि इंडिया एआई मिशन को विविध आवश्यकताओं और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार कंप्यूटिंग क्षमता, मॉडल और डेटा केवल एक उद्देश्य- प्रभावी एप्लिकेशन विकसित करने के लिए उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सैकड़ों स्टार्टअप एआई आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं और वास्तविक प्रभाव इन्हीं पहलों से उत्पन्न होगा।

सेवा गुणवत्ता में सुधार की क्षमता

एस. कृष्णन ने कहा कि सरकारों के पास कभी भी पर्याप्त संख्या में शिक्षक, डॉक्टर या न्यायाधीश नहीं होंगे, लेकिन यदि एआई उत्पादकता बढ़ाने में सक्षम होता है, तो सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

जिम्मेदार उपयोग और गोपनीयता पर फोकस

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती प्रभावी उपायों का चयन करना, उन्हें जिम्मेदारीपूर्वक लागू करना, नागरिकों की गोपनीयता की रक्षा करना और सार्वजनिक निवेश से मापने योग्य परिणाम सुनिश्चित करना है।

सत्र में जन-केंद्रित एआई और संप्रभु तकनीकी क्षमता की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। चर्चा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि एआई प्रणालियां सार्वजनिक सेवा वितरण और नागरिक कल्याण में ठोस सुधार लाएं। (इनपुट: आईएएनएस)

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