प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कांग्रेस पर विश्वासघात और नकारात्मक राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति देश को आगे ले जाने के बजाय समाज में विभाजन और नफरत फैलाने वाली रही है।
छोटे किसानों के साथ कांग्रेस ने किया विश्वासघात: पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने विश्वासघात करने में देश के अन्नदाता को भी नहीं छोड़ा। देश में करीब 10 करोड़ ऐसे किसान हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है, लेकिन कांग्रेस शासन में कभी छोटे किसानों की सुध नहीं ली गई। पीएम मोदी ने कहा कि छोटे किसानों की जमीनी हकीकत को समझते हुए उनकी सरकार पीएम किसान सम्मान निधि योजना लेकर आई और अब तक उनके खातों में करीब 4 लाख करोड़ रुपए सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं।
कांग्रेस की कार्यशैली रही लटकाना, अटकाना, भटकाना
नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के शासन की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीति हमेशा “लटकाना, अटकाना, भटकाना” की रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ जीप और खच्चर वाले मॉडल को जानती है। पीएम मोदी ने नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध का उदाहरण देते हुए कहा कि यह योजना उनके जन्म से पहले बनी थी, शिलान्यास पंडित नेहरू ने किया, लेकिन उद्घाटन उन्हें प्रधानमंत्री बनने के बाद करना पड़ा, जो कांग्रेस की नाकामी को दर्शाता है।
विकसित भारत बनाम कब्र खोदने की राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रही है, जबकि कांग्रेस “कब्र खोदने” की राजनीति में लगी हुई है। उन्होंने सवाल किया, “ये कौन सी मोहब्बत की दुकान है, जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करती है? क्या यह संविधान का अपमान नहीं है?”
कार्यान्वयन से कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस केवल कल्पनाएं कर सकती है, लेकिन कार्यान्वयन से उसका कोई संबंध नहीं रहा है। उन्होंने असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाले बोगीबील पुल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह परियोजना दशकों तक लटकी रही, लेकिन प्रगति पहल के तहत उनकी सरकार ने इसकी समीक्षा कर इसे पूरा किया, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र को बड़ा लाभ मिला।
140 करोड़ समाधान, कांग्रेस को देशवासियों पर भरोसा नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार को 140 करोड़ देशवासियों की क्षमता पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देशवासियों को ही समस्या मानती है, जबकि उनकी सोच यह है कि चाहे चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, देश के 140 करोड़ लोग ही उनके समाधान हैं। (इनपुट: आईएएनएस)


