12/06/26 | 1:45 pm

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टीवी-रेडियो प्रसारण के लिए एकीकृत नियमावली लाने की तैयारी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। नए नियमों का उद्देश्य टेलीविजन, रेडियो और अन्य प्रसारण सेवाओं से संबंधित विभिन्न दिशानिर्देशों को एकीकृत कर सरल और पारदर्शी नियामक ढांचा तैयार करना है।

संसद द्वारा 2023 में पारित दूरसंचार अधिनियम ने 1885 के पुराने भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम का स्थान लिया था। इसी नए कानून के तहत प्रसारण सेवाओं से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करने के लिए यह मसौदा तैयार किया गया है।

मंत्रालय के अनुसार, इस मसौदे में उपग्रह टीवी चैनलों की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग, डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) सेवाएं, हेडएंड-इन-द-स्काई (एचआईटीएस) सेवाएं, निजी एफएम रेडियो, सामुदायिक रेडियो और इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (आईपीटीवी) सेवाओं से जुड़े मौजूदा दिशानिर्देशों को एक ही नियमावली में शामिल किया गया है।

एकीकृत किए गए प्रमुख दिशानिर्देशों में वर्ष 2022 की उपग्रह टीवी चैनल नीति, 2001 की डीटीएच सेवा लाइसेंस नीति, 2009 की एचआईटीएस सेवा नीति, निजी एफएम रेडियो प्रसारण के तीसरे चरण से संबंधित नीति, 2024 की सामुदायिक रेडियो नीति तथा 2008 की आईपीटीवी सेवा संबंधी गाइडलाइन शामिल हैं।

मंत्रालय ने कहा कि नए नियम लागू होने के बाद प्रसारण सेवाओं को नियंत्रित करने वाले विभिन्न अलग-अलग दिशानिर्देश समाप्त हो जाएंगे और उनकी जगह एक एकीकृत नियामक व्यवस्था लागू होगी।

मसौदा नियमों की प्रमुख विशेषताओं में “परिवर्तन के साथ निरंतरता” का सिद्धांत अपनाया गया है। इसके तहत मौजूदा प्राधिकरण शर्तों को सरल और तर्कसंगत बनाया गया है, ताकि सुधारों के साथ सेवाओं की निरंतरता भी बनी रहे।

कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए एकल नियामक ढांचा, प्राधिकरण प्रक्रिया का डिजिटल क्रियान्वयन, अनुमति प्रक्रियाओं का सरलीकरण, ग्रांट ऑफ परमिशन एग्रीमेंट (जीओपीए) पर हस्ताक्षर की अनिवार्यता समाप्त करना तथा पारदर्शी न्यायिक व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

मंत्रालय ने मसौदा नियमों को अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक और अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए उपलब्ध कराया है।

इच्छुक व्यक्ति, संस्थाएं और हितधारक अपने सुझाव या टिप्पणियां 27 जुलाई 2026 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अवर सचिव (बीपी एंड एल) को भेज सकते हैं।