राष्ट्रपति मुर्मु से स्लोवाकिया और सर्बिया के राष्ट्रपतियों की मुलाकात, एआई व डिजिटल सहयोग पर जोर

स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने बुधवार (19 फरवरी 2026) को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से अलग-अलग मुलाकात की। बैठकों में एआई, डिजिटल प्रौद्योगिकी, व्यापार, निवेश और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर सार्थक चर्चा हुई।

भारत-स्लोवाकिया संबंधों को नई गति

राष्ट्रपति मुर्मु ने स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए अपनी पिछली राजकीय यात्रा की सुखद यादों को साझा किया और मिले आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में स्लोवाकिया की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह समय एआई के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग के लिए निर्णायक है।

एआई मानवता और समावेशी विकास के लिए

राष्ट्रपति ने कहा कि शिखर सम्मेलन “लोग, ग्रह और प्रगति” के सिद्धांतों पर आधारित है और भारत “जनहित के लिए प्रौद्योगिकी” के दृष्टिकोण के साथ एआई को सभी के लिए सुलभ व लाभकारी बनाने पर काम कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-स्लोवाकिया सहयोग वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

व्यापार, विज्ञान और रक्षा सहयोग में विस्तार

राष्ट्रपति ने संतोष जताया कि उच्च-स्तरीय जुड़ाव के साथ भारत और स्लोवाक गणराज्य के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, रक्षा और जन-जन के संबंधों में निरंतर विस्तार हुआ है। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि यह यात्रा द्विपक्षीय साझेदारी को और गति देगी तथा डिजिटल सहयोग सहित नए आयाम जोड़ेगी।

भारत-सर्बिया संबंधों की ऐतिहासिक गहराई

सर्बिया के राष्ट्रपति के साथ बैठक में राष्ट्रपति मुर्मु ने जून 2023 की अपनी सर्बिया यात्रा को याद करते हुए मिले स्नेहपूर्ण आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सह-संस्थापक देशों में शामिल होने से लेकर आज ग्लोबल साउथ में साझेदार बनने तक भारत और सर्बिया के बीच विशेष और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं।

एआई, व्यापार और निवेश में व्यापक संभावनाएं

राष्ट्रपति ने कहा कि एआई ऐसा क्षेत्र है, जहां दोनों देशों की क्षमता को देखते हुए सहयोग और सुदृढ़ किया जा सकता है। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ाने की व्यापक संभावनाओं पर भी जोर दिया। सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, कृषि, जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और शिक्षा को भविष्य के सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताया गया।

साझा समृद्धि के लिए सहयोग पर सहमति

दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने पारस्परिक लाभ और साझा समृद्धि के लिए सहयोग को निरंतर प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की। बैठकों में उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। (इनपुट: पीआईबी)