कोऑपरेटिव बैंकों को मजबूत करने के लिए आरबीआई और केंद्र सरकार का साझा प्रयास: पंकज चौधरी

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोऑपरेटिव बैंकों की वित्तीय स्थिति, संचालन और डिजिटल समावेशन को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। इन उपायों का मकसद जमा सुरक्षा बढ़ाने, ऋण उपलब्धता में सुधार और विवेकपूर्ण विनियमन को सशक्त करना है। यह जानकारी मंगलवार को संसद में दी गई।

एनसीडीसी को दिए गए ऋण होंगे प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि आरबीआई ने केंद्र सरकार के परामर्श से यह घोषणा की है कि 19 जनवरी 2026 से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को सहकारी समितियों को आगे ऋण देने के उद्देश्य से बैंकों द्वारा स्वीकृत किए गए ऋण, संबंधित श्रेणियों के अंतर्गत प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के रूप में वर्गीकृत किए जाने के पात्र होंगे।

कई श्रेणियों के बैंकों पर लागू होंगे नए नियम

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये प्रावधान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, शहरी कोऑपरेटिव बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और स्थानीय क्षेत्र बैंकों के अलावा अन्य बैंकों पर लागू होंगे। ये ऋण प्राथमिकता क्षेत्र ऋण संबंधी मास्टर डायरेक्शन, 2025 में निर्धारित उद्देश्यों और गतिविधियों के अनुरूप होंगे।

शहरी कोऑपरेटिव बैंकों को मिली नई राहत

पंकज चौधरी ने बताया कि शहरी कोऑपरेटिव बैंकों को नई शाखाएं खोलने की अनुमति दे दी गई है। इसके साथ ही, अब ये बैंक अपनी कुल लोन बुक का 25 प्रतिशत तक हिस्सा हाउसिंग लोन पर खर्च कर सकते हैं, जबकि पहले यह सीमा 10 प्रतिशत थी।

बैंकिंग विनियमन अधिनियम में अहम संशोधन

मंत्री ने कहा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम में संशोधन के तहत सहकारी बैंकों के निदेशकों का कार्यकाल 8 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया गया है। इसके अलावा, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) से जुड़ने के लिए सहकारी बैंकों पर लगने वाला लाइसेंस शुल्क भी कम किया गया है।

शहरी कोऑपरेटिव बैंकों के लिए अम्ब्रेला संगठन

उन्होंने बताया कि नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनयूसीएफडीसी) की स्थापना की गई है। यह एक गैर-जमा स्वीकार करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एबीएफसी) है, जिसे शहरी कोऑपरेटिव बैंकों के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अवसंरचना और परिचालन सहायता उपलब्ध कराना है।

ग्रामीण कोऑपरेटिव बैंकों पर भी फोकस

ग्रामीण कोऑपरेटिव बैंकों को तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए ‘सहकार सारथी’ की स्थापना की गई है। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्रामीण सहकारी बैंकों को एकीकृत लोकपाल योजना में भी शामिल कर लिया है, जिससे ग्राहकों की शिकायतों का समाधान और प्रभावी तरीके से हो सकेगा। (इनपुट: आईएएनएस)

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