प्रतिक्रिया | Saturday, July 13, 2024

12/06/24 | 5:57 pm

हिमंत बिस्व सरमा ने की घोषणा- असम सरकार ‘निजुत मोइना’ योजना के तहत छात्राओं को देगी मासिक स्टाइपेंड

मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने घोषणा की है कि राज्य सरकार ‘निजुत मोइना’ योजना के तहत छात्राओं को मासिक स्टाइपेंड देगी। इस योजना को बुधवार (12 जून) को राज्य की कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी है।

पत्रकार सम्मेलन में कैबिनेट में लिए गए फैसलों की दी जानकारी

राज्य की कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने पत्रकार सम्मेलन में कैबिनेट में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य छात्राओं में कम उम्र में विवाह करने की प्रवृत्ति को रोकना तथा उन्हें स्नातकोत्तर स्तर तक अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लेने वाली छात्राओं को राज्य सरकार हर महीने स्टाइपेंड देगी।

11वीं और 12वीं की छात्राओं को एक हजार रुपये का मासिक स्टाइपेंड मिलेगा

उल्लेखनीय है, इस योजना के तहत कक्षा 11वीं और 12वीं कक्षा में दाखिला लेने वाली छात्राओं को एक हजार रुपये का मासिक स्टाइपेंड मिलेगा। वहीं, स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाली छात्राओं को 1250 रुपये एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाली छात्राओं को असम सरकार की ओर से 2500 रुपये का मासिक स्टाइपेंड दिया जाएगा।

1 जुलाई से प्रत्येक कॉलेज में इस योजना के फार्म उपलब्ध होंगे

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जुलाई से प्रत्येक कॉलेज में इस योजना के फार्म उपलब्ध करा दिए जाएंगे। हर आय वर्ग के लोगों की बच्चियों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत पहली राशि 11 अक्टूबर को छात्राओं के खाते में भेज दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे माता-पिता और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ को कम होगा।

सरकार की ओर से दी जाएगी स्कूटी

इस योजना से उच्च शिक्षण संस्थानों में लड़कियों के नामांकन अनुपात में वृद्धि होने की संभावना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाली छात्राओं को स्कूटी दी थी। इसके परिणामस्वरूप प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाली लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि छात्राओं को 60 फ़ीसदी अंकों के साथ मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने पर सरकार की ओर से स्कूटी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना पर प्रत्येक वर्ष तीन सौ से साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की खर्च आएगा। छात्राओं की संख्या बढ़ने के साथ ही यह राशि बढ़कर 1500 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है।

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आखरी अपडेट: 13th Jul 2024