तालिबान के वरिष्ठ सदस्य मुफ्ती नूर अहमद नूर भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंचे हैं। अधिकारियों की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, नूर अफगानिस्तान दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स (सीडीए) का पद संभालेंगे।
भारत-अफगानिस्तान रिश्तों में सुधार, अक्टूबर 2025 में विदेश मंत्री मुत्ताकी के दौरे के बाद आपसी संबंधों में गर्मजोशी बढ़ी
इससे पहले नूर अहमद अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में फर्स्ट पॉलिटिकल डिपार्टमेंट के महानिदेशक के तौर पर काम कर चुके हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच के रिश्तों में पिछले कुछ महीनों में काफी सुधार आए हैं। अक्टूबर 2025 में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने सात दिनों का भारत दौरा किया था, जिसके बाद दोनों देशों के आपसी संबंधों में लगातार गर्मजोशी देखी जा रही है। एक सवाल के जवाब में मुत्ताकी ने कहा था, “यह हमारा झंडा है। यह 100 फीसदी हमारा दूतावास है। जो भी लोग यहां काम कर रहे हैं, वे सभी हमारे साथ हैं।”
मुफ्ती नूर, जो मुत्ताकी के प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, अफगान राजनयिकों को भारत में स्वीकार करने के समझौते पर सहमति बनने के बाद भारत में अफगान दूतावास की जिम्मेदारी संभालेंगे
खास बात यह है कि मुफ्ती नूर नई दिल्ली में विदेश मंत्री मुत्ताकी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इस दौरान मुत्ताकी ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुलाकात की थी। इस दौरान एक समझौते के तहत अफगान दूतावास के लिए इस्लामिक अमीरात द्वारा नियुक्त राजनयिकों को स्वीकार करने की बात पर सहमति बनी थी।
तालिबान के कब्जे के बाद विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा, नूर अहमद नूर को भारत में अफगान दूतावास की जिम्मेदारी मिली
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां के विदेश मंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा थी। अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के करीब पांच साल बाद नूर अहमद नूर को भारत स्थित अफगानिस्तानी दूतावास की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नूर ने इससे पहले दिसंबर 2025 में बांग्लादेश का दौरा किया था।
भारत ने तालिबान को मान्यता नहीं दी, लेकिन अफगानिस्तान में मदद जारी रखते हुए अहम मददगार बना हुआ है
भारत ने अब तक तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है, लेकिन भारत, अफगानिस्तान के एक अहम मददगार राष्ट्र के तौर पर उभर रहा है। भारत ने अफगानिस्तान में मदद और मेडिकल सप्लाई देना जारी रखा हुआ है। इसी तरह, मुंबई और हैदराबाद दोनों जगहों पर अफगान वाणिज्य दूतावास को तालिबान की ओर से नियुक्त राजदूत चला रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार द्वारा नियुक्त सईद मुहम्मद इब्राहिम खिल नई दिल्ली में अफगान एम्बेसी के सीडीए थे।
अफगान डेलिगेशन के दौरे का उद्देश्य भारत-अफगानिस्तान संबंध, व्यापार, ऊर्जा सहयोग और चाबहार पोर्ट की निवेश क्षमता व संचालन को प्रभावी तरीके से मजबूत करना है
इस बीच, अफगानिस्तान से भारत के कई बड़े डेलिगेशन के दौरे हुए हैं, जिनका मकसद आपसी रिश्तों, व्यापार और ऊर्जा के विकास को मजबूत करना और ईरान में भारत के बनाए चाबहार पोर्ट की क्षमता को एक्टिवेट करना और असरदार तरीके से इस्तेमाल करना है। इसके साथ ही इसका मकसद अधिक से अधिक निवेश लाना भी है।(इनपुट-आईएएनएस)


