सरकार ने मेडिकल डिवाइस के लिए नियामकीय आवश्यकताओं को सरल बनाने, परीक्षण शुल्क को एक समान करने और पात्र चिकित्सा उपकरणों को बाजार में तेजी से उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल डिवाइसेज रूल्स, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण नियामकीय सुधार किए गए हैं। इनका उद्देश्य नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और देश में उन्नत एवं नवीन चिकित्सा तकनीकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
प्रस्तावित संशोधन मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर केंद्रित हैं—मेडिकल डिवाइस की आउटसोर्स की गई नसबंदी से जुड़े प्रावधानों को सरल बनाना, परीक्षण शुल्क के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना और क्लिनिकल जांच की आवश्यकता से छूट के लिए मान्यता प्राप्त देशों की सूची में यूरोपीय संघ को शामिल करना।
आउटसोर्स नसबंदी के नियम होंगे आसान
मेडिकल डिवाइसेज रूल्स, 2017 के नियम 44 में प्रस्तावित संशोधन के तहत, आउटसोर्स नसबंदी सुविधा का इस्तेमाल करने वाले निर्माताओं को अब नियम 25 के तहत अलग से लोन लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी, बशर्ते संबंधित नसबंदी सुविधा के पास मेडिकल डिवाइसेज रूल्स, 2017 के तहत वैध लाइसेंस हो।
पहले जिन निर्माताओं के पास अपनी नसबंदी सुविधा नहीं थी, उन्हें नसबंदी संबंधी गतिविधियों के लिए अलग लोन लाइसेंस लेना पड़ता था।
मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से नियामकीय अनुपालन, दस्तावेजी प्रक्रिया, मंजूरी में लगने वाला समय और संबंधित लागत कम होने की उम्मीद है। इससे निर्माता विशेषीकृत नसबंदी सुविधाओं का अधिक आसानी से उपयोग कर सकेंगे।
मेडिकल डिवाइस की जांच फीस होगी एक समान
मेडिकल डिवाइसेज रूल्स, 2017 में नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) जोड़ी गई है, जिसमें मेडिकल डिवाइस टेस्टिंग लैबोरेटरीज द्वारा चिकित्सा उपकरणों के परीक्षण के लिए एक समान शुल्क निर्धारित किया गया है।
इससे अलग-अलग प्रयोगशालाओं में परीक्षण शुल्क में होने वाली भिन्नता और अस्पष्टता को कम करने में मदद मिलेगी।
मानकीकृत शुल्क व्यवस्था से निर्माताओं और आयातकों को लागत को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी। साथ ही, इससे विवाद कम करने, हितधारकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने तथा मेडिकल डिवाइस नियामकीय व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यूरोपीय संघ को भी मिलेगी मान्यता
सरकार ने नियम 63 में भी संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत यूरोपीय संघ (EU) को उन सख्त नियामकीय अधिकार क्षेत्रों की सूची में शामिल किया जाएगा, जिनके द्वारा पहले से मंजूर किए गए कुछ मेडिकल डिवाइस के लिए क्लिनिकल जांच की आवश्यकता से छूट दी जा सकती है।
वर्तमान में इस प्रावधान के तहत अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान को मान्यता प्राप्त है।
यूरोपीय संघ को इस सूची में शामिल करने से ऐसे पात्र मेडिकल डिवाइस को भारत में तेजी से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिन्हें पहले ही EU में मंजूरी मिल चुकी है। इससे निर्माताओं और आयातकों पर नियामकीय बोझ तथा मंजूरी में लगने वाला समय भी कम हो सकता है।
सरकार के अनुसार, इन सुधारों का व्यापक उद्देश्य मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में कारोबार सुगमता, पारदर्शिता और नियामकीय दक्षता बढ़ाना है, ताकि उन्नत और नवीन चिकित्सा तकनीकों की भारत में बाजार तक पहुंच तेज हो सके।
-आईएएनएस


