केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं पर लगभग 4,800 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है।
सरकार का मानना है कि इन पहलों से अंतिम छोर तक संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी, लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ेगी और नदी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
Ministry of Ports, Shipping and Waterways के अनुसार Brahmaputra Board को आधुनिक और प्रौद्योगिकी आधारित नदी बेसिन संगठन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इसके तहत डिजिटल प्रशासन प्रणाली, डेटा आधारित परियोजना निगरानी और North Eastern Hydraulic and Allied Research Institute यानी NEHARI जैसे अनुसंधान संस्थानों को पुनर्जीवित करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि सरकार ब्रह्मपुत्र को केवल नदी नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में संपर्क और आर्थिक विकास को गति देने वाली राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देखती है।
Inland Waterways Authority of India यानी IWAI ब्रह्मपुत्र नदी की क्षमता को विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
ब्रह्मपुत्र को राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित किया गया है, जो असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र को भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग के जरिए कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों से जोड़ता है।
मंत्री ने कहा कि यह मार्ग पर्यावरण अनुकूल, किफायती और प्रभावी परिवहन प्रणाली को पुनर्जीवित कर रहा है।
असम में अब तक लगभग 751 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इनमें पांडु, धुबरी और जोगीघोपा में टर्मिनल, फ्लोटिंग जेट्टी और तटीय सुविधाओं का उन्नयन शामिल है।
इसके अलावा 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर काम जारी है। इनमें ब्रह्मपुत्र में जलमार्ग विकास, जहाज मरम्मत सुविधा, पर्यटन जेट्टी और डिब्रूगढ़ में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है।
उन्होंने कहा कि GIS आधारित योजना और डिजिटल निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए जलमार्गों को हरित, कुशल और भविष्य के अनुरूप परिवहन गलियारे में बदला जा रहा है, साथ ही क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन को भी संरक्षित रखा जाएगा।
सरकार के अनुसार भारत, विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय जल परिवहन क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हुई है।
राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल परिवहन वर्ष 2014 के 18 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 218 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक हो गया है।
-(इनपुटःएजेंसी)


