नशे के खिलाफ जनजागरूकता और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के तहत आध्यात्मिक संगठनों के साथ अपनी साझेदारी का विस्तार कर रहा है। इसी कड़ी में चार प्रमुख आध्यात्मिक संगठनों के साथ बुधवार को नई दिल्ली में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य आध्यात्मिक संस्थाओं की सामाजिक पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना और नशामुक्ति के प्रयासों को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।
चार आध्यात्मिक संगठनों के साथ होगा समझौता
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, चिन्मय मिशन, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और हरे कृष्णा मूवमेंट के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करेगा। यह समारोह नई दिल्ली स्थित सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के कार्यालय में आयोजित होगा। इसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता सचिव सुधांश पंत, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और आध्यात्मिक संगठन के प्रतिनिधि एवं गुरु उपस्थित रहेंगे।
समुदायों में आध्यात्मिक संगठनों की अहम भूमिका
मंत्रालय के अनुसार, समुदायों का मार्गदर्शन करने, अनुशासन स्थापित करने और मूल्य आधारित जीवन को बढ़ावा देने में आध्यात्मिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी क्षमता को ध्यान में रखते हुए विभाग ने मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ जागरूकता और जनसंपर्क को मजबूत करने के लिए प्रमुख आध्यात्मिक संस्थानों के साथ साझेदारी शुरू की है।
पहले भी कई संस्थाओं के साथ हुआ समझौता
इससे पहले आर्ट ऑफ लिविंग, ब्रह्मा कुमारी, संत निरंकारी मिशन, इस्कॉन, श्री राम चंद्र मिशन, ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार, शिवानंद योग वेदांत धनवंतरी आश्रम और पतंजलि विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। इन साझेदारियों के जरिए नशे के खिलाफ जनजागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, स्वयंसेवकों को संगठित करने तथा नशामुक्ति के प्रयासों में योग, ध्यान और आध्यात्मिक परामर्श को शामिल करने में मदद मिली है।
‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में भागीदारी
आध्यात्मिक संगठनों की भागीदारी को एनएमबीए के तहत ‘नशा मुक्ति मित्र’ की भूमिका से भी जोड़ा जा रहा है। इन संस्थाओं की सामाजिक पहुंच के जरिए लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और जरूरतमंद लोगों को नशामुक्ति एवं पुनर्वास के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा।
रोकथाम और पुनर्प्राप्ति का संदेश जमीनी स्तर तक
मंत्रालय का मानना है कि आध्यात्मिक संगठनों की भागीदारी नैतिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के साथ-साथ समुदायों को संगठित करने और अभियान की पहुंच बढ़ाने में मदद करेगी। आध्यात्मिक शक्ति को सामाजिक एकजुटता के साथ जोड़कर एनएमबीए का लक्ष्य नशे की रोकथाम और नशामुक्ति के संदेश को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना है।
सामूहिक संकल्प को मजबूत करने पर जोर
मंत्रालय के अनुसार, इन साझेदारियों से नशा मुक्त भारत के विजन को साकार करने के लिए सामूहिक संकल्प और ‘समग्र समाज’ के दृष्टिकोण को मजबूती मिलेगी। सरकार का उद्देश्य एक स्वस्थ और मजबूत समाज के निर्माण के साथ विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ना है।
एनएमबीए ई-प्रतिज्ञा के जरिए जनभागीदारी
नशा मुक्त भारत अभियान के तहत नागरिकों को नशे के खिलाफ सामूहिक संकल्प लेने के लिए एनएमबीए ई-प्रतिज्ञा से भी जोड़ा जा रहा है। अभियान में सरकार, सामाजिक संस्थाओं, आध्यात्मिक संगठनों, स्वयंसेवकों और आम लोगों की भागीदारी के जरिए नशे के खिलाफ व्यापक सामाजिक आंदोलन खड़ा करने पर जोर दिया जा रहा है। (इनपुट: पीआईबी)


