पराक्रम दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को ओडिशा की अपनी पहली यात्रा पर कटक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मस्थान पर आयोजित पराक्रम दिवस समारोह में भाग लिया और कहा कि नेताजी की पुकार आज भी भारतीयों में साहस और संकल्प की प्रेरणा देती है।
भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत
भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कम्भमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य गण्यमान्य व्यक्तियों ने उपराष्ट्रपति का स्वागत किया। आगमन पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया।
‘कदम कदम बढ़ाए जा’ की गूंज के साथ नेताजी को नमन
कटक स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मस्थान पर आयोजित समारोह में इंडियन नेशनल आर्मी के प्रसिद्ध मार्चिंग गीत “कदम कदम बढ़ाए जा” की जोशभरी धुन गूंजी। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेताजी की पुकार आज भी देशवासियों को साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
विकसित भारत@2047 के लिए सामूहिक संकल्प का आह्वान
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नागरिकों से नेताजी के मजबूत, आत्मनिर्भर और शक्तिशाली राष्ट्र के विजन से प्रेरणा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए सामूहिक संकल्प लेना चाहिए।
स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों को किया सम्मानित
पराक्रम दिवस समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने स्वतंत्रता सेनानी मयाधर मल्लिक और विंग कमांडर बीएस सिंह देव (रिटायर्ड) को सम्मानित किया। इसके साथ ही उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी के पूर्व सैनिकों के परिवारजनों को भी सम्मान प्रदान किया।
बलिदान के लिए देश सदैव रहेगा ऋणी
उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश स्वतंत्रता सेनानियों और हमारे बहादुर सैनिकों के साहस, बलिदान और निस्वार्थ सेवा के लिए सदैव उनका ऋणी रहेगा। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक असाधारण व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि ओडिशा समृद्ध कला, संस्कृति और इतिहास की भूमि है और नेताजी जैसे नायकों की वजह से ही भारत आजादी की सांस ले रहा है।
संग्रहालय और प्रदर्शनी का किया उद्घाटन
इसके बाद उपराष्ट्रपति ने कटक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जन्मस्थान संग्रहालय में आईएनए पोस्टल स्टैम्प गैलरी, नेताजी संस्कृति भवन और संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें युवा पीढ़ी को नेताजी के जीवन, उनके बलिदानों और स्थायी विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखा नेताजी का विजन
कार्यक्रम में क्यूरेटेड प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी शामिल रहीं, जिनमें एक मजबूत, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विजन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है नेताजी की जयंती
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती हर वर्ष 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में हुआ था। (इनपुट: आईएएनएस)


