उपराष्ट्रपति ने पी. एन. पणिक्कर पर पुस्तक का किया विमोचन, पढ़ने की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में पी. पी. सत्यन द्वारा लिखित पुस्तक ‘द लाइब्रेरी मैन ऑफ इंडिया: द स्टोरी ऑफ पी. एन. पणिक्कर’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने पढ़ने की संस्कृति के पुनरुद्धार पर जोर देते हुए कहा कि जो समाज पढ़ना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे गहन चिंतन, रचनात्मक कल्पना और आलोचनात्मक समझ की क्षमता खो देता है।

पी. एन. पणिक्कर को बताया दूरदर्शी व्यक्तित्व

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने पी. एन. पणिक्कर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें ऐसा दूरदर्शी व्यक्ति बताया, जिन्होंने पुस्तकों और ज्ञान की शक्ति के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन को बदलने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक श्री पणिक्कर की असाधारण दूरदृष्टि और अमिट विरासत का प्रमाण है।

पुस्तकालय आंदोलन से बदली सामाजिक चेतना

उपराष्ट्रपति ने कहा कि केरल के कुट्टानाड से शुरू हुई श्री पणिक्कर की यात्रा ने पुस्तकालय और साक्षरता आंदोलन को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि श्री पणिक्कर ने गांवों और दूरदराज के आदिवासी इलाकों में जाकर “पढ़ो और आगे बढ़ो” का संदेश दिया और आम लोगों में शिक्षा व जागरूकता की अलख जगाई।

युवाओं में घटती पढ़ने की आदत पर जताई चिंता

सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और संक्षिप्त मनोरंजन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण युवाओं में पढ़ने की आदत कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि तकनीक ने सुविधा तो दी है, लेकिन धैर्य, एकाग्रता और साहित्य के साथ गहरे जुड़ाव को भी प्रभावित किया है।

पुस्तकालयों को रचनात्मकता के केंद्र बनाने पर जोर

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तकालयों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें जानकारी, नवाचार और रचनात्मकता के गतिशील केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में साझा किए गए पुस्तकालयों से जुड़े विजन का भी उल्लेख किया।

सरकार की पहलों की सराहना

उन्होंने “एक राष्ट्र, एक सदस्यता” पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय शोध और पत्रिकाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी। साथ ही ज्ञान भारतम मिशन के जरिए भारत की हस्तलिखित विरासत को संरक्षित और डिजिटाइज करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

पढ़ने और सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक पुस्तकालय किसी बच्चे का भविष्य बदल सकता है और एक किताब जीवन को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और संस्थानों से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए विशेष प्रयास करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति पी. जे. कुरियन, पी. एन. पणिक्कर फाउंडेशन के उपाध्यक्ष एन. बालगोपाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। (इनपुट: पीआईबी)