अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के खिलाफ पूरे यूरोप में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के तहत हजारों प्रदर्शनकारी लंदन की सड़कों पर उतर आए और जमकर नारेबाजी की। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में प्रदर्शनकारियों का सैलाब रसेल स्क्वायर से व्हाइटहॉल तक मार्च करता हुआ आगे बढ़ा। वे बैनर लहरा रहे थे और हमलों की निंदा करते हुए नारे लगा रहे थे। उनकी आवाज़ें मध्य लंदन में गूंज उठीं क्योंकि बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंताएं सड़कों पर दिखाई देने लगीं।

बाद में आयोजित एक रैली में, प्रतिभागियों ने तुरंत युद्ध विराम और मध्य पूर्व में विदेशी हस्तक्षेप खत्म करने की मांग की। “स्टॉप द वार ऑन ईरान” का पोस्टर पकड़े एक प्रदर्शनकारी मरियम ने इस अभियान को वाशिंगटन द्वारा “एपिक फ्यूरी” कहे जाने की आलोचना की और इसे “एपिक फेल्योर” बताया। उन्होंने कहा, “कोई विदेशी हस्तक्षेप नहीं। मध्य पूर्व से हाथ हटाओ और बमबारी बंद करो। लोगों को शांति से जीने का अधिकार है। आप लोगों पर बमबारी करके लोकतंत्र नहीं ला सकते।”

बर्मिंघम से आए एक अन्य प्रदर्शनकारी एड्रियन ने ईरान पर हमलों को “पूरी तरह से शर्मनाक” और “स्पष्ट रूप से थकाऊ” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके परिणाम जैसे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक असुरक्षा पहले ही महसूस किए जा रहे हैं। लंदन का यह प्रदर्शन शनिवार को पूरे यूरोप में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा था, जो जारी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ बढ़ते विरोध को दर्शाता है।

स्पेन में हजारों लोग मैड्रिड में एकत्र हुए, जहां अधिकारियों के अनुसार लगभग 4,000 लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारी एटोचा से पोएट्रा डेल सोल तक मार्च करते हुए “नो टू वार, नो टू नाटो” और “स्पेन इज नॉट द यूएस” जैसे नारे लिखे पोस्टर लेकर चले। पोडेमास पार्टी के महासचिव लोने बेलारा और राजनीतिक सचिव इरेन मोन्टेरो भी रैली में शामिल हुए। मोन्टेरो ने स्पेन से नाटो से बाहर निकलने का आह्वान किया और क्षेत्र में पश्चिमी सैन्य नीति की व्यापक आलोचना की।

अन्य जगहों पर भी कई यूरोपीय शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। लिस्बन में 14 मार्च को सैकड़ों लोग बारिश के बीच अमेरिकी दूतावास के पास एकत्र हुए। यह प्रदर्शन पुर्तगाली शांति और सहयोग परिषद द्वारा आयोजित किया गया था। 70 से अधिक संगठनों के समर्थन से प्रतिभागियों ने अमेरिका और इज़राइल की कथित आक्रामकता की निंदा की और “यस टू पीस, नाट टू वार” जैसे नारे लगाए। साथ ही निरस्त्रीकरण की मांग की।

सोफिया में 2 मार्च को सैकड़ों लोगों ने मार्च निकाला, जिनके हाथों में “नो वार अगेंस्ट ईरान” और “यूएस मिलिटरी एयरक्राफ्ट नाट वेलकम हेयर” जैसे पोस्टर थे। प्रदर्शनकारियों ने हमलों को समाप्त करने और बुल्गारिया से अमेरिकी सैन्य विमानों को हटाने की मांग की।इसी तरह के प्रदर्शन फ्रांस और ग्रीस सहित कई देशों में भी हुए, जब यह संघर्ष तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया। जनता के विरोध के बीच, यूरोपीय विश्‍लेषकों की ओर से भी आलोचना सामने आई है। नीदरलैंड के लेडेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉब डेविक ने अमेरिकी कार्रवाइयों को “सीधा ब्लैकमेल” बताया और चेतावनी दी कि यह यूरोपीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि यूरोप को अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए और अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करना चाहिए।(इनपुट-आईएएनएस)

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