प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश को ऐसे युवाओं को लोक सेवाओं में लाना चाहिए, जो सरकारी पद पाने के लिए आकर्षित न हों, बल्कि जनसेवा से प्रेरित हों। पीएम मोदी ने आज गुरुवार को नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भर्ती परीक्षा में केवल यह न परखा जाए कि अभ्यर्थी को कितना ज्ञान है, बल्कि यह भी देखा जाए कि ‘‘वह युवा सिविल सेवाओं में क्यों आना चाहता है।’’
पीएम मोदी ने कहा, “आज का यह दिन यूपीएससी (UPSC) के 100 वर्षों के साथ एक विरासत का भी उत्सव है..100 वर्ष की इस यात्रा में पीढ़िया और सरकार बदली है लेकिन UPSC पर भरोसा उतना ही मजबूत है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “इतिहास के आगे बढ़कर अब हमारे सामने भारत का भविष्य इंतजार कर रहा है। 21वीं सदी का एक क्वार्टर बीत चुका है। आने वाले 20-25 साल भारत के लिए बहुत अहम हैं। विकसित भारत के लिए देश को जिस तरह का नेतृत्व चाहिए उसका बहुत बड़ा माध्यम UPSC और राज्यों के चयन आयोग भी हैं, हमें राष्ट्र प्रथम और नागरिक प्रथम का ध्यान रखना है। “
उन्होंने कहा, “AI हजारों दस्तावेजों को कुछ ही क्षणों में प्रोसेस कर सकता है, यह बदलती हुई सोच हमारी सिविल सर्विस से भी नए बदलाव की मांग करती है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे युवाओं को लाना होगा जो पब्लिक ऑफिस से नहीं बल्कि पब्लिक सर्विस से आकर्षित हो।”
पीएम मोदी ने कहा कि आज के दौर में हमारा मंत्र है नागरिक देवो भवः। आज 21वीं सदी का भारत नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। आज बहुत तेजी से युग और तकनीक बदल रहे है। इसके बाद आने वाले समय में समाज के सामने नई तरह की चुनौती आ रही है। इस समय AI को लेकर समाज में चर्चा छिड़ी हुई है। ऐसे में हमारे सिविल सर्वेंट भी अलग तरह की परिस्थितियों में काम करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर एक स्मारक सिक्का, डाक टिकट और ‘100 लैंडमार्क जजमेंट्स : शेपिंग द पॉलिसीज ऑफ यूपीएससी एंड पब्लिक सर्विस कमीशंस इन इंडिया’ शीर्षक वाली पुस्तक भी जारी की।
यह कार्यक्रम उन सालभर चले समारोहों के समापन के अवसर पर आयोजित किया गया, जो एक अक्टूबर 2025 को शुरू हुए थे। इन समारोहों का आयोजन 1926 में यूपीएससी की हुई स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया। (इनपुट-एजेंसी)


