प्रतिक्रिया | Tuesday, April 16, 2024

05/01/24 | 2:57 pm

इंदौर, भोपाल और उदयपुर शहर होंगे Wetland City घोषित, केन्द्र सरकार ने रामसर संस्था को भेजा प्रस्ताव

केन्द्र सरकार ने पहले वेटलैंड सिटी एक्रिडिटेशन के लिए राजस्थान के उदयपुर, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर शहर का नाम शामिल किया है। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इन तीनों शहरों को वेटलैंड घोषित करने का प्रस्ताव स्विट्जरलैंड रामसर संस्था को भेजा है। इन शहरों को आर्द्रभूमि (वेटलैंड) वाले शहर का टैग वाले इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। दरअसल इस वर्ष के बजट के भाग के रूप में घोषित पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की चल रही अमृत धरोहर पहल का उद्देश्य रामसर साइटों के अद्वितीय संरक्षण मूल्यों को बढ़ावा देकर इसी प्रकार के लक्ष्यों को प्राप्त करना है। इस संदर्भ में, डब्ल्यूसीए न केवल शहरी और अर्ध-शहरी आर्द्रभूमि के संरक्षण के बारे में जन जागरूकता उत्पन्न करेगा, बल्कि पूरे देश में अमृत धरोहर के कार्यान्वयन में भी सहायता प्रदान करेगा।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बताया कि इंदौर, भोपाल और उदयपुर, ये पहले तीन भारतीय शहर हैं जिनके लिए नगर निगमों के सहयोग से संबंधित राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर डब्ल्यूसीए के लिए नामांकन प्रस्तुत किए गए हैं। इन शहरों में और उसके आसपास स्थित आर्द्रभूमि अपने नागरिकों को बाढ़ विनियमन, आजीविका के अवसरों, मनोरंजक और सांस्कृतिक मूल्यों के संदर्भ में अनेक लाभ प्रदान करती है। सिरपुर वेटलैंड (इंदौर में रामसर साइट), यशवंत सागर (इंदौर के समीप रामसर साइट), भोज वेटलैंड (भोपाल में रामसर साइट) और उदयपुर और उसके आसपास कई वेटलैंड्स (झीलें) इन शहरों के लिए जीवन रेखा के रूप में काम करते हैं।

भूपेंद्र यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर दी जानकारी 

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स (x) पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बताते हुए खुशी हो रही है कि कि देश के पहले तीन शहरों इंदौर, भोपाल और उदयपुर को रामसर साइट के नामांकन के लिए पेश किया गया है। इस योजना का लक्ष्य शहरी क्षेत्र से सटे आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के संरक्षण और उचित उपयोग के साथ स्थानीय आबादी के लिए सामाजिक-आर्थिक लाभ को बढ़ावा देना है। उन्होंने आगे कहा कि यह उन शहरों के लिए भी एक अवसर प्रदान करेगा जो अपनी प्राकृतिक या मानव निर्मित आर्द्रभूमि को महत्व देते हैं और उन्हें आर्द्रभूमि के साथ मजबूत सकारात्मक संबंधों को प्रदर्शित करने के अपने प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता और सकारात्मक ब्रांडिंग के अवसर प्राप्त होंगे।

https://x.com/byadavbjp/status/1742911902601380069?s=20

उदयपुर, भोपाल और इंदौर अब होंगे वेटलैंड सिटी 

बता दें कि अभी तक भारत का एक भी शहर वेटलैंड के रूप में शामिल नहीं है। जहां तक उदयपुर जिले की बाात है तो उदयपुर प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध है और उदयपुर के जलस्रोत वेटलैण्ड सूची में भी नामित हैं, ऐसे में वेटलैण्ड सिटी घोषित होने पर जलस्रोतों के संरक्षण में सहयोग मिलेगा। जलस्रोतों के कैचमेंट मैनेजमेंट, वाटरशेड मैनेजमेंट, इको ट्यूरिज्म, एग्रो ट्यूरिज्म आदि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं भोपाल भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक है, जिसने अपने नगर विकास योजना 2031 के प्रारूप में आर्द्रभूमि के आसपास संरक्षण क्षेत्रों का प्रस्ताव दिया है। भोज वेटलैंड, रामसर साइट शहर की जीवन रेखा है, जो विश्व स्तरीय वेटलैंड व्याख्या केंद्र, जल तरंग से सुसज्जित है। इसके अतिरिक्त, भोपाल नगर निगम के पास एक समर्पित झील संरक्षण सेल है।

अब बात करते है इंदौर की, इंदौर शहर की स्थापना होलकर ने की थी और यह भारत का सबसे स्वच्छ शहर है और अपने सर्वश्रेष्ठ स्वच्छता, पानी और शहरी पर्यावरण के लिए भारत के स्मार्ट सिटी अवार्ड 2023 का विजेता है। सिरपुर झील, शहर में एक रामसर स्थल, को जल पक्षी समागम के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में मान्यता दी गई है और इसे पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। 200 से ज्यादा आर्द्रभूमि मित्रों का एक मजबूत नेटवर्क पक्षी संरक्षण और सारस क्रेन की रक्षा के लिए स्थानीय समुदाय को संवेदनशील बनाने का काम कर रहा है।

वेटलैंड सिटी के यह होंगे फायदे

उल्लेखनीय है कि वेटलैंड सिटी प्रमाणन से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। जल स्रोतों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और इको ट्यूरिज्म बढ़ेगा। झीलों और जलाशयों में दूसरी गतिविधयां रुकेंगी। विश्व पटल पर उदयपुर शहर की एक अलग पहचान बनेगी। जैव विविधता व पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता प्रदर्शित होगी साथ ही शहरी विकास और पर्यावरण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में प्राथमिकता मिलेगी। जलाशयों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए स्थानीय निकायों की प्रतिबद्धता तय होगी।

वेटलैंड सिटी प्रमाणन (WCA) क्या है ?

वेटलैंड सिटी प्रमाणन या एक्रिडिटेशन को वर्ष 2015 में आयोजित COP12 में रामसर कन्वेंशन ने संकल्प 11.10 के तहत एक स्वैच्छिक आर्द्रभूमि शहर मान्यता प्रणाली को मंजूरी प्रदान की, जो उन शहरों को प्रमाणन देता है जिन्होंने अपने शहरी आर्द्रभूमि की सुरक्षा के लिए असाधारण कदम उठाए हैं। वेटलैंड सिटी प्रमाणन योजना का उद्देश्य शहरी और अर्ध-शहरी आर्द्रभूमि के संरक्षण और स्मार्ट उपयोग को बढ़ावा देना है, साथ ही स्थानीय आबादी के लिए स्थायी सामाजिक-आर्थिक लाभ भी है। यह स्वैच्छिक योजना उन शहरों के लिए एक अवसर प्रदान करती है जो अपने प्राकृतिक या मानव निर्मित आर्द्रभूमि को महत्व देते हैं जिससे वे आर्द्रभूमि के साथ मजबूत सकारात्मक संबंधों का प्रदर्शन करने में अपनी कोशिशों के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता और सकारात्मक ब्रांडिंग का अवसर प्राप्त कर सकें।

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आखरी अपडेट: 16th Apr 2024