प्रतिक्रिया | Tuesday, April 16, 2024

06/12/23 | 12:09 pm

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के नेत्वृत्व में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच जल विवाद पर अहम बैठक

जल शक्ति मंत्रालय ने कृष्णा नदी पर परियोजनाओं के प्रबंधन और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच जल वितरण पर आज (6 दिसंबर) को एक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। कृष्णा नदी के पानी के उपयोग, वितरण या नियंत्रण पर दोनों राज्यों के बीच विवाद के समाधान से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों में विकास के नए रास्ते खुलेंगे और इसका दोनों राज्यों के लोगों को लाभ मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शनिवार (2 दिसंबर) को एक वर्चुअल बैठक में जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्य सचिवों से कहा कि वे पानी के बंटवारे पर लड़ाई बंद करें। उन्होंने आंध्र प्रदेश से यह भी कहा कि वह 6 दिसंबर तक नागार्जुन सागर से पानी लेना बंद कर दे, जब दोनों तेलुगु राज्यों के बीच बैठक होगी।

मुख्य सचिव ने एपी के साथ किए गए “ऐतिहासिक अन्याय” के बारे में बताया, क्योंकि श्रीशैलम परियोजना में बाएं किनारे पर सुविधाओं का नियंत्रण तेलंगाना द्वारा ले लिया गया है, हालांकि श्रीशैलम परियोजना को कुरनूल मुख्य अभियंता के नियंत्रण में माना जाता है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश ने तेलंगाना से दाहिनी मुख्य नहर के माध्यम से पानी छोडऩे का अनुरोध किया है, जो विशेष रूप से एपी की जरूरतों को पूरा करती है और केआरएमबी (KRMB) के रिलीज आदेशों को लागू करने के लिए एपी के क्षेत्र में स्थित है।

केआरएमबी के अधिकार क्षेत्र पर भारत सरकार की अधिसूचना के कार्यान्वयन पर निर्णय लेने तक परियोजना स्थल पर कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एपी पुलिस की उपस्थिति जारी रहेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जीओ एपी ने केआरएमबी को पहचाने गए टेक के नियंत्रण पर रोक लगाने की इच्छा व्यक्त करते हुए आदेश जारी किए हैं, जबकि तेलंगाना ने कथित तौर पर ऐसा करने से इनकार कर दिया है। इस बीच, पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए नागार्जुन सागर की दाहिनी मुख्य नहर के माध्यम से एपी के पात्र सहमत आवंटित हिस्से से पांच टीएमसी फीट पानी छोड़ने के लिए एक मांगपत्र रखा गया है। सचिव, एमओजेएस ने एपी से पानी छोड़ने को रोकने का अनुरोध किया है ताकि केआरएमबी (KRMB) सोमवार को एपी द्वारा रखे गए मांगपत्र पर निर्णय ले सके और सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए 6 दिसंबर को दिल्ली में मीटिंग के प्रस्ताव पर सहमति हुई है।

मुख्य सचिव ने सचिव, एमओजेएस से अनुरोध किया कि वह केआरएमबी के अध्यक्ष को निर्देश दें कि केआरएमबी मुख्यालय को हैदराबाद से विशाखापत्तनम में जल्द से जल्द स्थानांतरित किया जाए क्योंकि उपयुक्त आवास तैयार रखा गया है, जिसके लिए सचिव, एमओजेएस ने सहमति व्यक्त की है।

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आखरी अपडेट: 16th Apr 2024