प्रतिक्रिया | Saturday, April 13, 2024

07/12/23 | 11:26 am

देश में हर साल नए स्वैपिंग स्टेशन स्‍थापित किए जा रहे हैं : नितिन गडकरी

देश में प्रदूषण के स्तर को कम करने और परिवहन के अधिक टिकाऊ तरीकों पर स्विच करने के लिए जागरूकता बढ़ रही है, जिसके चलते इलेक्ट्रिक वाहन लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की वजह भी से देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस मांग को और गति देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विकास किया जा रहा है। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रसार में इसके संभावित लाभों को ध्यान में रखते हुए, नीति आयोग ने 2 और 3-पहिया केंद्रित बैटरी स्वैपिंग के लिए एक मसौदा नीति रूपरेखा तैयार करने के लिए फरवरी 2022 में एक अंतर-मंत्रालयी चर्चा की थी।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा को एक लिखित उत्तर में जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि प्रस्तावित नीति देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही  FAME और PLI जैसी कई योजनाएं चल रही है। भारत में बैटरी स्वैपिंग पहले से ही चालू है और देश में हर साल नए स्वैपिंग स्टेशन आ रहे हैं। 

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास के लिया उठाये जा रहे महत्वपूर्ण कदम
नितिन गडकरी ने बताया कि भारत में बैटरी स्वैपिंग पहले से ही चल रही है और देश में हर साल नए स्वैपिंग स्टेशन स्‍थापित किए जा रहे हैं। नीति आयोग बैटरी स्वैपिंग ऑपरेटरों, बैटरी निर्माताओं, वाहन ओईएम, वित्तीय संस्थानों, सीएसओ, थिंक टैंक और अन्य विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्टाकहोल्डरों  के व्यापक स्पेक्ट्रम के साथ लगातार चर्चा कर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों का बैटरी इकोसिस्‍टम एक जटिल क्षेत्र है जिसमें विभिन्न प्रकार की टेक्नोलॉजी शामिल हैं जो अभी भी विकसित हो रही हैं। इसलिए यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारत की मौजूदा बैटरी स्वैपिंग प्रथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुसार है। 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि बैटरी स्वैपिंग के लिए एक ऐसी विवेकपूर्ण नीति बनाने के लिए जो तकनीकी नवाचार (technological innovation) पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देती हो। इस संबंध में नीति आयोग, भारतीय मानक ब्यूरो, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और इस विभाग के अन्य स्टेकहोल्डरों  के साथ नीतिगत मसौदे पर व्‍यापक रूप से विचार-विमर्श कर रहा है। 

बैटरी स्वैपिंग क्या है ?
बता दें कि बैटरी स्वैपिंग इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने का एक ऑप्शन  है जिसमें डिस्चार्ज बैटरी को चार्ज की गई बैटरी से बदलना शामिल है। बैटरी स्वैपिंग का उपयोग आमतौर पर 2 और 3 पहिया वाहनों जैसे छोटी बैटरी वाले वाहनों के लिए किया जाता है। बैटरी स्वैपिंग में चार्जिंग स्टेशन से चार्ज की गई बैटरी को इलेक्ट्रिक वाहन की डिस्चार्ज हो चुकी बैटरी से बदला जा सकता है। बैटरी स्वैपिंग का उपयोग छोटे वाहनों जैसे कि दो-पहिया और तिपहिया वाहनों के लिए किया जाता है। 

क्या है बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी का मकसद ?
इस पॉलिसी के पीछे सरकार का मकसद इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तेजी से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है। बैटरी स्वैपिंग स्टेशन को लगाने में कम जगह लगती है। जिसका मतलब यह हुआ कि यह चार्जिंग स्टेशन के मुकाबले कम जगह घेरते हैं। शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए जगह की कमी प्राथमिक कारणों में से एक है। असल में बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी को भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास में महत्वपूर्ण कदमों में से एक माना जा रहा है। 

बैटरी-स्वैपिंग तकनीक पूरे भारत में गेम चेंजर हुई साबित 
यह भी उल्लेखनीय है कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोपहिया और तिपहिया ईवी के लिए बैटरी-स्वैपिंग तकनीक पूरे भारत में गेम चेंजर साबित हुई है।  इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने सोमवार को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए कोलकाता में अपना पहला बैटरी-स्वैपिंग स्टेशन खोला। कंपनी ने एक बयान में कहा, तेल विपणन पीएसयू ने सन मोबिलिटी के सहयोग से शहर के पूर्वी इलाके में न्यू टाउन में अपने खुदरा आउटलेट पर सुविधा खोली है, यह टिकाऊ और सुलभ इलेक्ट्रिक गतिशीलता समाधानों को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम है, और ऐसा माना जा रहा है कि अत्याधुनिक तकनीक भविष्य में गतिशीलता को बढ़ावा देगी और ईवी उपयोगकर्ताओं के लिए बाधाओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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आखरी अपडेट: 13th Apr 2024