प्रतिक्रिया | Saturday, April 13, 2024

28/11/23 | 10:18 am

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय दिव्यांग बच्चों के लिए करेगा आंगनवाड़ी प्रोटोकॉल लॉन्च

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय दिव्यांग बच्चों के लिए आंगनवाड़ी प्रोटोकॉल लॉन्च करेगा। इसके लिए आज (28 नवंबर) को मंत्रालय विज्ञान भवन में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है, जो मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के पोषण भी पढ़ाई भी कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय महिला एवं बाल विकास (WCD) और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी करेंगी। केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और आयुष राज्य मंत्री मुंजपारा महेंद्रभाई भी सभा को संबोधित करेंगे।

आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह उजागर करना है कि जोखिम वाले या विकलांगता और/या विकासात्मक देरी वाले शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप, विशेष सहायता और सेवाओं के माध्यम से बच्चों की भलाई में समग्र सुधार महत्वपूर्ण और संभव है।

 

दिव्यांग बच्चों के लिए आंगनवाड़ी इको-सिस्टम महत्वपूर्ण 
परिवार और सामुदायिक जीवन में दिव्यांग बच्चों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए परिवारों और समुदायों को शिक्षित करने और इस काम में उनकी मदद करने की आवश्यकता है। इसके लिए जन्म से लेकर छह वर्ष तक के आठ करोड़ से अधिक बच्चों तक दैनिक आधार पर पहुंच बनाकर उनके भविष्‍य को सुरक्षित करने हेतु उनका आधार मजबूत करने के लिए आंगनवाड़ी इको-सिस्टम महत्वपूर्ण है। 

 

NEP 2020 में दिव्यांग छात्रों को स्कूलों से जोड़ने की प्राथमिकता 
दरअसल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के बजाय दिव्यांग छात्रों को मुख्यधारा के स्कूलों से जोड़ने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फाउंडेशनल स्टेज 2022 के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा स्कूलों में बच्‍चों के विकास में देरी और दिव्‍यांगता से निपटने के तरीकों की सिफारिश करती है, जिसमें संकेतों और लक्षणों पर सलाह भी शामिल है। इसके लिए पोषण भी पढाई भी कार्यक्रम ने खेल-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षण के लिए राष्ट्रीय ईसीसीई टास्कफोर्स (ECCE Taskforce ) की सिफारिश को अपनाया है और दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष और समय पर सहायता की दृढ़ता से वकालत करता है। 

 

पोषण भी पढाई भी 
दिव्यांगजन के लिए मसौदा राष्ट्रीय नीति (2021) में यह अनुमान है कि भारत में अधिकांश दिव्‍यांगताओं में से एक-तिहाई मामलों को रोका जा सकता है, यदि उनका शीघ्र पता लग जाये और पर्याप्त रूप से उनका इलाज हो। बता दें कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने विगत मई माह में केंद्र के प्रमुख कार्यक्रम 'पोषण भी, पढ़ाई भी' की शुरुआत की, जो देश भर के आँगनवाड़ियों में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (Early Childhood Care and Education- ECCE) पर केंद्रित है। इसके लिए मंत्रालय ने ईसीसीई को लागू करने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 

 

आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण केंद्र के साथ-साथ शिक्षा प्रदान करने वाले केंद्र भी है बनाना 
छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल, पोषण और प्रारंभिक बचपन की शिक्षा प्रदान करने में आँगनवाड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत की भावी पीढ़ियों के नींव को मजबूत करने पर केन्द्रित ‘पोषण भी पढाई भी’कार्यक्रम के माध्यम से, 13.9 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बहु-संवेदी और खिलौना-आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए कुशल बनाया जाएगा।

एक पैनल चर्चा होगी
आंगनवाड़ी केंद्र में शीघ्र पहचान, स्क्रीनिंग और समावेशन के लिए रणनीतियों पर एक पैनल चर्चा होगी। इस प्रोग्राम में एमओएचएफडब्ल्यू, डीईपीडब्ल्यूडी के वरिष्‍ठ अधिकारी और राज्य डब्‍ल्‍यूसीडी के सचिव और एनआईएमएचएएनएस जैसे प्रमुख संगठनों के विशेषज्ञों के भाग लेने की उम्मीद है। देश भर से सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता भी भाग लेंगी। दिव्यांग बच्चों के लिए काम करने और उनकी देखभाल करने का अनुभव रखने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अपने अनुभव और काम करने के सर्वोत्तम तरीकों को साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

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आखरी अपडेट: 13th Apr 2024