04/12/23 | 8:44 pm

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मिजोरम में जोरम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी को पूर्ण बहुमत, 27 सीटों पर जीत दर्ज की,MNF को 10, बीजेपी को 2 और कांग्रेस को एक सीट

मिजोरम के 40 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में जोरम पीपुल्स मूवमेंट सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। जोरम पीपुल्स मूवमेंट ने 27 सीट जीतकर बहुमत हासिल कर लिया। वहीं सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट के खाते में 10 सीटें हासिल कीं हैं।

मुख्यमंत्री जोरमथंगा अपनी सीट हारे 

मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा आइजोल-ईस्ट 1 से चुनाव हार गए। उन्हें जोरम पीपुल्स के ललथनसंगा ने 2101 वोटों से हराया। उधर बीजेपी की बात करें तो दो सीटों पर जीत हासिल की हैं। पिछली बार पार्टी को एक सीट मिली थी। जबकि कांग्रेस के खाते में एक सीट आई। 

जोरम पीपुल्स मूवमेंट के नेता लालदुहोमा ने कहा मैं पार्टी की जीत पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा इसी तरह के नतीजों की उम्मीद थी। उन्होंने बताया कि दो दिनों भीतर ही राज्यपाल से मिलकर शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को पूरी करेंगे।बता दें कि IPS अधिकारी रहे लालदुहोमा पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की सिक्योरिटी संभाल चुके हैं। उनकी पार्टी ने दूसरी बार विधानसभा चुनाव लड़ा है। 2018 में जोरम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी को सिर्फ 8 सीटें मिली थीं।

छह दलों के गठबंधन से बनी जोरम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी 

जोरम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी शुरुआत में छह क्षेत्रीय दलों का गठबंधन था। जिसमें मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, जोरम नेशनलिस्ट पार्टी, जोरम एक्सोडस मूवमेंट,जोरम डिसेंट्रलाइजेशन फ्रंट,जोरम रिफॉर्मेशन फ्रंट और मिजोरम पीपुल्स पार्टी शामिल थीं।

2018 में ZPM ने इसी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था और आठ सीटें जीतीं। इसके बाद चुनाव आयोग (ECI) ने आधिकारिक तौर पर जुलाई 2019 में पार्टी को रजिस्टर्ड किया। सबसे बड़ी संस्थापक पार्टी मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, 2019 में गठबंधन से बाहर हो गई थी और बाकी बची पांच पार्टियां एक में शामिल हो गईं, जिसे जोरम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी नाम दिया गया।

जोरम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी के मुखिया लालदुहोमा 

मिजो नेशनल फ्रंट और कांग्रेस के अलावा मिजोरम में तीसरी बड़ी पार्टी जोरम पीपुल्स मूवमेंट है। इसके नेता लालदुहोमा एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिक्योरिटी भी संभाल चुके हैं। अभी राहुल गांधी की जब संसद सदस्यता चली गई थी तो लालदुहोमा एक बार फिर चर्चा में आ गए थे।

दरअसल, लालदुहोमा ने 1984 में मिजोरम से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सीट जीती थी। बाद में उनका राज्य कांग्रेस के नेताओं से मतभेद हो गया और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। वे 1988 में दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने वाले पहले लोकसभा सांसद बने। 2018 में लालदुहोमा ने आइजोल पश्चिम – और सेरछिप से निर्दलीय चुनाव जीत गए थे।

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